भारतीय मौसम विभाग के अनुमान से पहले देश की निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट ने अनुमान जारी करते हुए कहा है कि इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून अपने समय से केरल के तटों पर दस्तक देने जा रहा है। हालांकि स्काईमेट का अनुमान है कि इस साल मानसून की एंट्री सामान्य से कमजोर रहने की उम्मीद है?

स्काईमेट के सीईओ जतिन सिंह ने कहा, ‘‘इस मौसम में सभी चार क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश होने जा रही है। पूर्व और पूर्वोत्तर भारत तथा मध्य हिस्सा बारिश के मामले में उत्तर पश्चिम भारत और दक्षिणी प्रायद्वीप से खराब स्थिति में रहेंगे। मानसून की शुरुआत चार जून के आसपास होगी। ऐसा लगता है कि भारतीय प्रायद्वीप में मानसून का शुरुआती चरण धीमा होने जा रहा है।’’

दक्षिण-पश्चिम मानसून देश का प्रमुख मानसून है। इस मानसून के जरिए देश के अधिकांश इलाकें में नई से सितंबर तक बारिश देखने को मिलती है। इस साल के लिए स्काइमेट ने 93% बारिश होने की संभावना जाहिर की है। इसमें जून से सितंबर की अवधि में दीर्घावधि औसत 887 मिलीमीटर वर्षा में 5% का एरर मार्जिन की भी संभावना स्काईमेट ने जताई है।

इससे पहले स्काइमेट ने 14 मई को देश के चारों प्रमुख क्षेत्रों में 2019 के मॉनसून के प्रदर्शन का अनुमान जारी करते हुए क्षेत्रवार पूर्वानुमान में 8% का एरर मार्जिन बताया था। वहीं केरल में दस्तक से पहले भारत में मानसून की बारिश 22 मई को अंडमान और निकोबार द्वीप पहुंचने की संभावना जताई गई है। आमतौर पर अंडमान और निकोबार में 20 मई को मॉनसून दस्तक देता है और इस साल दो दिन की देरी की संभावना है।

मौसम विभाग के मुताबिक जून से सितंबर तक भारतीय उपमहाद्वीप पर आने वाला मानसून देश की आधा से ज्यादा फसलों की सिंचाई के लिए जिम्मेदार रहता है। बीते कुछ वर्षों से एल नीनो के खतरे, सामान्य से कमजोर और महज कुछ इलाकों में अच्छी बारिश से देश में किसानों की चिंता बढ़ गई है। लिहाजा, इस साल समय से आ रहा मानसून किसानों के लिए बड़ी राहत ला रहा है।

मानसून की बारिश से किसान अपनी खरीफ फसल की बुआई की तैयारी करते हैं। मौसम के आंकड़ों के मुताबिक आमतौर पर 1 जून से मानसून का आगमन देश में मौसम के लिए सामान्य माना जाता है. वहीं पिछले साल मानसून ने 6 जून को केरल के तटों पर दस्तक दी थी जिसके चलते देश में औसत से कम बारिश देखने को मिली और अनाज की पैदावार में भी गिरावट देखने को मिली थी।