
UPSC Success Story: केरल के कोट्टायम की रहने वाली बस कंडक्टर की बेटी रेनू राज ने मेडिकल कॅरियर चुना। डॉक्टर बनीं। काम के दौरान उन्हें लगा कि प्रशासनिक सेवा का हिस्सा बनकर ज्यादा लोगों की मदद की जा सकती है तो उन्होंने यूपीएससी एग्जाम की प्रिपरेशन शुरू कर दी। पहले ही प्रयास में दूसरी रैंक हासिल कर इतिहास रच दिया। आइए जानते हैं आईएएस रेनू राज की सक्सेस स्टोरी।
आईएएस रेनू राज एजूकेशन?
रेनू राज की शुरूआती पढ़ाई चांगनास्सेरी के सेंट टेरेसा हायर सेकेंडरी स्कूल से हुई। कोट्टायम के सरकारी मेडिकल कॉलेज से डॉक्टरी की पढ़ाई की। उनके पिता गवर्नमेंट जॉब में थे। परिवार चलाने के लिए बस कंडक्टर का काम भी करते थे। मां हाउस मेकर हैं। ऐसे में समझ सकते हैं कि एक बस कंडक्टर की बेटी के लिए मेडिकल की पढ़ाई करना आसान नहीं था।
आईएएस की तैयारी कैसे करें?
बहरहाल, मेडिकल की पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्होंने सर्जन के रूप में काम शुरू किया। साल 2013 से ही मेडिकल प्रैक्टिस करते हुए यूपीएससी की तैयारी में जुट गईं। डेली 3-6 घंटे पढ़ाई करती थीं। 6 से 7 महीने यह रूटीन फॉलो करने के बाद उन्होंने यूपीएससी प्रिपरेशन पर पूरा फोकस करने का फैसला लिया। यूपीएससी का मेंस एग्जाम देने के बाद फिर मेडिकल प्रैक्टिस करने लगीं। रिजल्ट आया तो उनको भरोसा नहीं हो रहा था। पहले ही प्रयास में यूपीएससी में दूसरी रैंक हासिल की थी।
कैसे मिली आईएएस बनने की प्रेरणा?
रिपोर्ट्स के अनुसार, डॉ. रेनू राज कहती हैं कि एक डॉक्टर के रूप में 50 या 100 मरीजों को ही फायदा पहुंचाया जा सकता है। पर सिविल सर्विस के जरिए हजारों लोगों के जीवन में बदलाव लाया जा सकता है। इसी सोच से इंस्पायर होकर यूपीएससी एग्जाम में बैठने का फैसला लिया था। इस तरह उन्होंने फुल टाइम जॉब और यूपीएससी तैयारी के बीच बैलेंस बनाते हुए सक्सेस हासिल की। उनकी कहानी एस्पिरेंट्स के लिए प्रेरणादायक है।
आईएएस रेनू राज हसबैंड?
आईएएस अफसर के रूप में भी रेनू राज ने मुन्नार में अनाधिकृत निर्माण और अतिक्रमण के लिखाफ सख्त अभियान चलाया। इसके लिए भी उन्हें याद किया जाता है। उन्होंने आईएएस श्रीराम वेंकटरमण से मैरिज की है। हालंकि उनकी पहली शादी हेल्थकेयर प्रोफेशनल डॉ. भगत एलएस से हुई थी। पर रेनू ने साल 2014 में आईएएस श्रीराम से दूसरी शादी की। श्रीराम साल 2012 में आईएएस बने थे।
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