ब्रेकअप के साइड इफेक्टः आप-कांग्रेस में तेज हुई सियासी जंग

Shashank Shekhar |  
Published : Apr 25, 2019, 06:44 PM IST
ब्रेकअप के साइड इफेक्टः आप-कांग्रेस में तेज हुई सियासी जंग

सार

‘आप’ ने एक टीम बनाई है, जिसका काम वोटरों तक यह संदेश पहुंचाना है कि कांग्रेस को वोट देना उसे खराब करने जैसा है। वहीं कांग्रेस की कोशिश मतदाताओं को यह बताने की है कि दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार अपने वादों को पूरा करने में नाकाम रही है। 

तमाम कोशिशों के बाद भी दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) और कांग्रेस के बीच गठबंधन को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका। अब दोनों दल एक दूसरे के खिलाफ नकारात्मक अभियान चलाने की रणनीति पर चल रहे हैं। ‘आप’ ने एक टीम बनाई है, जिसका काम वोटरों तक यह संदेश पहुंचाना है कि कांग्रेस को वोट देना उसे खराब करने जैसा है। वहीं कांग्रेस की कोशिश मतदाताओं को यह बताने की है कि दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार अपने वादों को पूरा करने में नाकाम रही है। 

‘आप’ की ओर से वॉलंटियर्स की एक टीम बनाई गई है। इसमें महिलाएं, वरिष्ठ नागरिक, पेशेवर और समाज के अलग-अलग वर्गों के लोग शामिल हैं। ये सभी लोग घर-घर जाकर ‘आप’ के लिए प्रचार कर रहे हैं। ये लोग न सिर्फ पार्टी की ओर से दिल्ली में किए गए काम का ब्यौरा लोगों तक पहुंचा रहे हैं, बल्कि कांग्रेस के खिलाफ भी अभियान चला रहे हैं। इस कवायद का मकसद कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगाना है। साल 2015 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ऐसा करने में सफल रही थी। 

‘आप’ के कुछ वरिष्ठ नेताओं के अनुसार, पार्टी के कार्यकर्ता वोटरों से मिलकर उनको यह कहेंगे कि अगर वे कांग्रेस को अपना वोट देते हैं तो यह बेकार हो जाएगा। उनका दावा है कि कांग्रेस दिल्ली में एक सीट भी जीतने की स्थिति में नहीं है। 

पार्टी के विधायक गोपाल राय के मुताबिक, ‘दिल्ली में कांग्रेस को वोट देने का मतलब एक तरह से भाजपा को वोट देना है, क्योंकि इससे दिल्ली में सिर्फ वोट कटेंगे। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दिल्ली में बिना किसी एजेंडा के चुनाव लड़ रही हैं। इस चुनाव में हर वोट कीमती है। लोगों को यह पता होना चाहिए कि कांग्रेस भाजपा को मदद पहुंचाने की कोशिश कर रही है।’

पार्टी के घोषणापत्र को लांच करते समय भी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविदं केजरीवाल ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा और उन्हें दोनों दलों के बीच गठबंधन न होने का जिम्मेदार ठहराया। केजरीवाल ने कहा, ‘मैं राहुल गांधी से पूछना चाहता हूं कि ट्विटर पर कौन सा गठबंधन बनता है। अगर मोदी और शाह की सत्ता में वापसी हुई तो सिर्फ कांग्रेस ही इसके लिए जिम्मेदार होगी।’

पार्टी के वरिष्ठ नेता ने कहा कि भाजपा ने दिल्ली के लिए कोई काम नहीं किया है और लोगो उनसे पहले ही नाराज हैं। कांग्रेस दिल्ली में अपना जनाधार खो चुकी है। उन्होंने कहा, ‘हम भाजपा और कांग्रेस दोनों को बेनकाब करेंगे। दोनों दलों ने दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के मुद्दे को रोका है। इसके चलते दिल्ली के विकास में बाधा आ रही है। हम लोगों के बीच जाकर उन्हें इसकी जानकारी देंगे।’

कांग्रेस और आप का दिल्ली में वोटबैंक एक ही है। दोनों ही दल राजधानी में गरीबों, अल्पसंख्यकों और मध्यम वर्ग के एक बड़े धड़े का वोट पाते रहे हैं। साल 2015 में इन सभी वर्गों ने ‘आप’ के पक्ष में अभूतपूर्व मतदान किया था। केजरीवाल को अब भी अल्पसंख्यकों और दलितों का समर्थन हासिल है। अलबत्ता कांग्रेस कुछ हद तक अपने वोट बैंक को वापस पाने में सफल रही है। 

उधर, कांग्रेस ने भाजपा पर सियासी हमले तेज रखने के साथ-साथ दिल्ली में आम आदमी पार्टी को बेनकाब करने की योजना बनाई है। कांग्रेस नेता  ने ‘माय नेशन’ से कहा, ‘आप’ ने दिल्ली की जनता से झूठे वादे किए, जिनके लिए दिल्ली के लोगों ने उन्हें अभूतपूर्व जनादेश दिया था। लेकिन अब दिल्ली की जनता खुद को ठगा महसूस कर रही है और राजधानी में विकास का कोई भी काम नहीं हुआ।’ 

दिल्ली में लोकसभा के समर के लिए कांग्रेस ने अपने अनुभवी नेताओं को मैदान में उतारा है। कांग्रेस के कार्यकर्ता दिल्ली में शीला दीक्षित के कार्यकाल के दौरान हुए काम को गिना रहे हैं। 

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