
नई दिल्ली। पाकिस्तान अफगानिस्तान में किसी भी हाल में शांति नहीं चाहता है। लिहाजा वह पहले से इसके लिए रोड़े अटका रहा था। ताकि अमेरिका और तालिबान के बीच होने वाला समझौता रद्द हो सके। अब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तालिबान के साथ एक शांति समझौते को रद्द करने का फैसला किया है। कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद अफगानिस्तान ने भारत सरकार के फैसले का समर्थन किया था। जिससे पाकिस्तान अफगानिस्तान की सरकार से चिड़ा हुआ है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिलहाल तालिबान के साथ शांति समझौते को रद्द कर दिया है। ये फैसला अफगानिस्तान में तालिबान द्वारा एक बम विस्फोट की जिम्मेदारी लेने का बाद लिया गया है। ट्रंप आज कैंप डेविड में तालिबान के शीर्ष नेताओं के साथ इस शांति समझौते के लिए मिलने वाले थे और इससे ठीक पहले उन्होंने इससे अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं।
इसके साथ ही ट्रंप की अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी साथ मुलाकात होनी थी। लेकिन अब फिलहाल अफगानिस्तान में शांति की उम्मीद कम ही है। अफगानिस्तान में चुनाव होने हैं और ऐसे में तालिबान आतंकी इसका विरोध करेंगे और पूरे देश में विस्फोट कर आम लोगों की जान लेंगे।
असल में काबुल में बम विस्फोट हुआ था और इसकी जिम्मेदारी तालिबान ने ली थी। इस बम विस्फोट में एक अमेरिकी सैनिक समेत 12 लोगों की मौत हो गई थी। इस शांति समझौते की घोषणा पिछले सोमवार को ही की गई थी। इसके तहत अमेरिकी प्रशासन द्वारा अफगानिस्तान से 5,400 अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाया जाना था। फिलहाल वर्तमान में वहां पर लगभग 14,000 सैनिक तैनात हैं।
असल में पाकिस्तान भी नहीं चाहता था कि अफगानिस्तान में शांति स्थापित हो। पाकिस्तान तालिबान को समर्थन देता है। कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद अफगानिस्तान ने भारत के फैसले का समर्थन किया था। जिसके बाद पाकिस्तान बौखला गया था। वह किसी भी हाल में नहीं चाहता था कि वहां पर अमन चैन कायम हो। गौरतलब है कि पिछले दिनों पाकिस्तान ने अपने पश्चिमी सीमा पर तैनात सैनिकों को अफगान सीमा से हटा लिया था।
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