कोरोना संकट में बिच्छू घास को बना दिया हर्बल टी, अब दिल्ली मेट्रो की नौकरी छोड़कर दान सिंह कमा रहे हैं लाखों

Published : Sep 21, 2020, 06:49 PM ISTUpdated : Sep 22, 2020, 07:42 PM IST
कोरोना संकट में बिच्छू घास को बना दिया हर्बल टी, अब दिल्ली मेट्रो की नौकरी छोड़कर दान सिंह कमा रहे हैं लाखों

सार

असल में दान सिंह उस घास में प्रयोग किया। जिसका उपयोग किया नहीं जाता है। अब दान सिंह गांव में रहकर कंडाली घास को हर्बल टी बनाकर बेच रहे हैं। इससे उन्हें रोजगार मिल गया है और वह स्थानीय स्तर पर कई लोगों को इस रोजगार से जोड़ने की तैयारी में है।

नई दिल्ली। कहते हैं अगर हौसला है तो व्यक्ति क्या नहीं कर सकता है। वहीं अगर हौसला है तो विपरीत परिस्थिति भी अवसर में बदल जाती है।  ऐसी ही कहानी है उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में रहने वाले दान की। दान सिंह दिल्ली में मेट्रो में नौकरी करते थे, लेकिन कोरोना संकटकाल में नौकरी छूटने के बाद वह वापस गांव चले आए। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और उत्तराखंड में कंडाली घास को हर्बल चाय में बदल दिया। 

असल में दान सिंह उस घास में प्रयोग किया। जिसका उपयोग किया नहीं जाता है। अब दान सिंह गांव में रहकर कंडाली घास को हर्बल टी बनाकर बेच रहे हैं। इससे उन्हें रोजगार मिल गया है और वह स्थानीय स्तर पर कई लोगों को इस रोजगार से जोड़ने की तैयारी में है। उत्तराखंड राज्य में अल्मोड़ा जिले के नौबाड़ा गांव के दान सिंह उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं, जिनकी नौकरी या व्यवसाय कोरोना संकटकाल में खत्म हो गया है या फिर बंद हो गया है।  

दान सिंह दिल्ली में मेट्रो की नौकरी करते थे। लेकिन कोरोना संकट काल में नौकरी भी छूट गई और वह घर आ गए। लेकिन यहां पर भी दिल्ली से ज्यादा बुरा हाल था। क्योंकि दिल्ली और मुंबई समेत बड़े शहरों में जितने लोग बेरोजगार हुए थे, वह गांव लौट आए थे। लिहाजा दान सिंह ने कुछ नया करने की सोची और नया रोजगार शुरू किया। यहां गांव में रहते हुए दान सिंह ने बिच्छू घास जिसे कि स्थानीय भाषा में शिसून भी कहा जाता है। उसके जरिए अपने कारोबार को शुरू किया। उन्होंने इस घास से हर्बल चाय बनाई और उसका व्यापार करना शुरू कर दिया। अब वह घर पर रहकर

कंडाली के पत्तों को तोड़कर हर्बल चाय बनाकर बेच रहे है। असल में कंडाली घास  में कई तरह के आयुर्वेदिक गुण होते हैं और इसकी जानकारी उन्हें गांव के बड़े-बुजुर्गों से मिली।  इसके साथ ही दान सिंह ने गांव में "देवभूमि पलायन रोको कल्याण समिति" के नाम का एक सामाजिक संगठन बनाया। जो गांवों में बने स्वदेशी उत्पादों को लेकर काम कर रहा है। यहां बने उत्पादों को वह दिल्ली समेत बड़े शहरों में बेच रहे हैं।

दान सिंह के मुताबिक उन्होंने कंडाली घास के बारे में परिजनों और बड़े बुजुर्गों से इसके बारे में सुना था कि इसमें पाए जाने वाले खनिज तत्वों के बारे में कहा जाता है कि इसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने की शक्ति होती है। अब दान सिंह पहाड़ में तुलसी लेमन ग्रास और कंडाली के मिश्रण से हर्बल चाय की कोशिश कर रहे हैं। इसकी पैकेजिंग की और मिश्रण बनाकर बाजार में उतार दिया। वहीं हर्बल चाय को जानी मानी ऑनलाइन मार्केटिंग कम्पनी अमेजन की तरफ आर्डर मिलने शुरू हो गए हैं। इस हर्बल चाय की कीमत एक हजार प्रति किलो मिल रही है।
 

PREV

MyNation Hindi पर पाएं आज की ताजा खबरें (Aaj Ki Taza Khabar)। यहां आपको राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ब्रेकिंग न्यूज़ और देश-दुनिया की महत्वपूर्ण घटनाओं की तुरंत और भरोसेमंद जानकारी मिलती है। राजनीति, अर्थव्यवस्था, खेल, मनोरंजन और टेक सहित हर बड़ी खबर पर रहें अपडेट—तेज, सटीक और आसान भाषा में।

Recommended Stories

CBSE Result 2026: सूरत के व्हाइट लोटस इंटरनेशनल स्कूल का शानदार प्रदर्शन, 10वीं में 100% रिजल्ट और संस्कृत में 100/100 की विशेष उपलब्धि
CBSE Board 10th Result 2026: गौतम क्लासेस का कमाल, 100% रिजल्ट के साथ छात्रों में 20% तक सुधार