
नई दिल्ली। वस्तु और सेवा कर परिषद की आज अहम बैठक में लॉटरी पर 28 फीसदी टैक्स लगाने फैसला लिया। हालांकि लॉटरी उद्योग इस पर 12 फीसदी टैक्स लगाने की मांग कर रहा है। उद्योग लॉटरी में मिलने वाली पुरस्कार राशि पर टैक्स हटाने के लिए दबाव डाल रहा है और उसका कहना है कि इसमें लागू मौजूदा दोहरी दर व्यवस्था इस व्यवसाय की वृद्धि में बाधा है।
फिलहाल जीएसटी काउंसिल ने नए अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था के तहत लॉटरी में 1 मार्च 2020 से 28 प्रतिशत टैक्स लागू करने का फैसला किया। कर की दर निर्धारित की। जीएसटी अधिनियम के तहत, लॉटरी पर दोहरी दरें लागू की जाती हैं। एक राज्य के भीतर बेचे जाने वाले राज्य लॉटरी पर लगाया गया जीएसटी दर 12 प्रतिशत है जबकि 28 प्रतिशत की दर उस राज्य के बाहर बेचे जाने पर लागू होती है। आज की बैठक में 21 राज्यों ने एक समान दर के पक्ष में मतदान किया।
फिलहाल आज की बैठक में राज्यों के बीच मतभेदों को सुलझाने के लिए, जीएसटी परिषद ने पहले महाराष्ट्र के वित्त मंत्री सुधीर मुनगंटीवार की अध्यक्षता में मंत्रियों के आठ सदस्यीय समूह का गठन किया था। यही नहीं काउंसिल ने जुलाई की बैठक में इस मुद्दे पर अटॉर्नी जनरल से कानूनी राय लेने का फैसला किया था। हालांकि पहले उम्मीद की जा रही थी कि आज की बैठक में काउंसिल कई उत्पादों में टैक्स स्लैब को बदल सकती और इसके खिलाफ पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा केन्द्रीय वित्त मंत्री को पत्र लिखकर उत्पाद में नया कर नहीं लागू करने की मांग की की थी।
राज्य सरकार का कहना था कि देश में महंगाई दर ज्यादा और उद्योग खस्ता हाल हैं। लिहाजा कर व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं होना चाहिए। असल में आज की बैठक में टैक्स संग्रह के नए विकल्पों पर भी चर्चा हुई। लेकिन फिलहाल इस पर कोई फैसला नहीं लिया जा सका।
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