रेप पीड़िताओं से नहीं किया जाए अछूत बर्ताव: सुप्रीम कोर्ट

Published : Dec 11, 2018, 03:51 PM IST
रेप पीड़िताओं से नहीं किया जाए अछूत बर्ताव: सुप्रीम कोर्ट

सार

कोर्ट ने कहा है कि यौन उत्पीड़न के मामलों में पुलिस द्वारा दर्ज की जाने वाली एफआईआर, जिसमें पीड़ित नाबालिग हो उसे कतई सार्वजनिक न किया जाए। 

देश की शीर्ष अदालत ने बलात्कार पीड़‍िताओं की पहचान उजागर करने की घटनाओं पर कड़ी आपत्ति जताई है। सर्वोच्च अदालत ने इस बात पर भी चिंता जाहिर की है कि समाज में दुष्‍कर्म पीड़‍िता के साथ अछूत की तरह व्‍यवहार किया जाता है।

अदालत ने केंद्र और संघ शासित प्रदेशों को प्रत्येक जिले में एक वन स्टॉप सेंटर बनाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने इस बारे में मीडिया को भी दिशा निर्देश जारी किया है। 

जस्टिस मदन बी लोकुर ने प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को निर्देश जारी करते हुए कहा कि किसी भी रूप में दुष्कर्म या यौन शोषण पीड़िता की पहचान उजागर नहीं कर सकते। 

कोर्ट ने यह भी कहा है कि इस तरह के मामलों में पुलिस द्वारा दर्ज की जाने वाली एफआईआर, जिसमें पीड़ित नाबालिग हो उसे कतई सार्वजनिक न किया जाए। 

इसके साथ अदालत ने केंद्र-राज्य सरकारों और संघ शासित प्रदेशों को रेप पीड़िताओं के कल्याण और पुनर्वास के लिए महत्वपूर्ण निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि प्रत्येक जिले में रेप पीड़िताओं के लिए एक वन स्टॉप सेंटर बनना चाहिए, जिससे दुष्‍कर्म संबंधित मामलों का समाधान निकाला जा सके।

अदालत ने समाज की मानसिकता में भी बदलाव की बात कही। कोर्ट ने कहा, 'यह बहुत दुखद है कि समाज में दुष्‍कर्म पीड़िताओं के साथ आरोपी की तरह व्यवहार किया जाता है। उन्हें सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ता है। इस मानसिकता में बदलाव होना ही चाहिए। 

सर्वोच्च अदालत ने रेप पीड़िताओं के नाम, तस्वीर सार्वजनिक करने पर सख्त आपत्ति जाहिर की और कहा कि जांच एजेंसी, पुलिस या मीडिया के द्वारा किसी भी सूरत में रेप पीड़िताओं की पहचान सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए।
 

PREV

Recommended Stories

Surat News: व्हाइट लोटस इंटरनेशनल स्कूल में नाइट कैंप, स्काई गेज़िंग और रचनात्मक गतिविधियों से बच्चों ने सीखा नया अनुभव
Surat News: शारदा विद्यामंदिर और S.V.M. स्कूल में दो दिवसीय वार्षिक फन फेयर, छात्रों की रचनात्मकता ने जीता दिल