
केंद्र सरकार की ओर से जारी किए गए नए निगरानी नियमों के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने गृह मंत्रालय को नोटिस जारी कर 6 हफ्ते में जवाब मांगा है।
यह याचिका दायर करने वाले एम एल शर्मा ने सरकार द्वारा जारी नोटिफिकेशन पर रोक लगाने की मांग की है। याचिकाकर्ता वकील शर्मा ने अपनी दलील में कहा कि लोगों के कंप्यूटर का बड़े पैमाने पर अवैध तरीके से सर्विलांस हो रहा है। यहां तक कि जुडिशरी और अन्य नामी हस्तियों के कंप्यूटर की निगरानी हो रही है।
गौरतलब है कि इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी कानून के बने नियमों के तहत डाटा निगरानी के गृह मंत्रालय ने नए आदेश जारी किए है। इसके तहत 10 खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों को किसी भी कंप्यूटर की निगरानी का सीमित अधिकार दिया गया है।
इसमें किसी भी कंप्यूटर सिस्टम में दर्ज सारा डाटा जुटाने, उनपर नजर रखने और उन्हें डिक्रिट करने का अधिकार शामिल है।
जिन एजेंसियों को नजर रखने का अधिकार दिया गया है उसमें आईबी, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, ईडी, सीबीडीटी, राजस्व खुफिया निदेशालय, सीबीआई, एनआईए, रिसर्च एंड एनालिसिस विंग, जम्मू-कश्मीर, असम और पूर्वोत्तर में कार्यरत सिग्नल गुप्तचर महानिदेशालय और दिल्ली पुलिस को ही किसी भी कंप्यूटर की निगरानी का अधिकार हासिल है।
जिसके खिलाफ एम एल शर्मा ने याचिका दायर की है। वह इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट में कई जनहित याचिकाएं दायर कर चुके हैं। इससे पहले कोर्ट ने शर्मा पर एक गैरजरूरी याचिका दाखिल करने के लिए 50 हजार रुपये जुर्माना लगाया था।
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