
नयी दिल्ली। आपने पशु-पक्षियों का हॉस्पिटल तो देखा होगा। क्या कभी पेड़-पौधों के अस्पताल के बारे में सुना है? तो अब जान लीजिए। एक शख्स ने पंजाब में दुनिया का पहला "ट्री एंड प्लांट" हॉस्पिटल शुरु किया है। पेड़-पौधों की जीवन रक्षा के लिए "ट्री-एम्बूलेंस" भी है। अब तक 10 से ज्यादा शहरों में 450 जंगल क्रिएट कर चुके हैं। 750 से ज्यादा वर्टिकल गार्डेन लगा चुके हैं। हम बात कर रहे हैं IRS अफसर रोहित मेहरा और उनकी पत्नी गीतांजलि मेहरा की। जिन्हें ग्रीन मैन आफ इंडिया भी कहा जाता है। माई नेशन हिंदी ने रोहित मेहरा से बातचीत कर पेड़-पौधे लगाने की उनकी जर्नी के बारे में जाना।
पॉल्यूशन की वजह से स्कूल बंद हुए तो...
IRS रोहित मेहरा का जन्म अमृतसर में हुआ। डीएवी कॉलेज हाथी गेट से पढ़ाई की। आईआरएस बनें। मौजूदा समय में आयकर विभाग, दिल्ली में पोस्टेड हैं। बचपन से ही उन्हें हरियाली पसंद थी। मौका मिलने पर पेड़ लगाने जुट जाते थे। उनका यही शौक एक दिन जुनून बन गया और अब यही उनकी खास पहचान है। पंजाब के लुधियाना में पोस्टिंग के दौरान एक बार बच्चों के स्कूल पॉल्यूशन की वजह से बंद हो गएं। इस घटना ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि वह आने वाली पीढ़ी को कैसी विरासत सौप कर जाएंगे?
10 से ज्यादा शहरों में तैयार कर चुके हैं जंगल
रोहित मेहरा ने साल 2015 में अपने जीवन काल में कम से कम एक लाख पेड़ लगाने का लक्ष्य बनाया और उसे पूरा करने में जुट गएं। सबसे पहले लुधियाना रेलवे स्टेशन पर एक वर्टिकल गार्डन तैयार किया। फिर पीछे पलटकर नहीं देखा। वह जिस शहर मे रहें। वहीं पेड़-पौधे लगाने का काम किया। जम्मू, महाराष्ट्र, यूपी, उत्तराखंड, गुजरात के अलावा अमृतसर, बटाला, संगरूर, ध्यानपुर, लुधियाना, जालंधर, जैसे तमाम शहरों में जंगल तैयार किए।
पांच तत्वों को देखते हुए बनाएं वृक्षायुर्वेद वन
रोहित मेहरा कहते हैं कि इन 8 से 9 वर्षों में लाखो पेड़-पौधे लगाकर 450 छोटे-बड़े जंगल तैयार किए। उन जंगलों की साइज भी आधा एकड़ से लेकर 12 एकड़ तक है। वृक्षायुर्वेद तकनीक से जंगल बसाने की मुहिम में उनकी पत्नी गीतांजलि मेहरा भी सक्रिय भूमिका निभाती हैं। कहा जाता है कि यह संसार पंचमहाभूतों (आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी) से बना है। ठीक वैसा ही पेड़ों के लिए भी है। रोहित कहते हैं कि हम जंगल बनाने से पहले मिट्टी चेक करते हैं। उसको ट्रीट करते हैं। देखते हैं कि पानी नीचे से आना चाहिए या पानी ऊपर से डालना होगा। पौधे कितने टेम्प्रेचर पर लगाना चाहिए। इन पांच तत्वों को देखते हुए वृक्षायुर्वेद वन (Vriksayurveda mini-forest) बनाएं। देश की राजधानी दिल्ली में 30 वन तैयार किए हैं। दिल्ली के स्कूलों को भी हरा-भरा करने का काम शुरु कर रहे हैं।
पौधों से जुड़ी 33 तरह की प्रॉब्लम का इलाज
रोहित कहते हैं कि हमने सोचा कि यदि दुनिया में पशु-पक्षियों और ह्यूमन के हॉस्पिटल हो सकते हैं तो प्लांट्स के क्यों नहीं? फिर हमने बीमार पेड़-पौधों को बचाने के लिए ट्री एंड प्लांट हॉस्पिटल शुरू कर दिया। हमने प्लांट्स की 33 तरह की प्रॉब्लम्स को आइडेंटिफाई किया है। सबसे बड़ी बात यह है कि यदि मिट्टी हेल्दी रहेगी तो पेड़ भी हेल्दी होगा। हम लोग इन सब चीजों को प्रॉपरली क्योर करते हैं। हॉस्पिटल में वनस्पति विज्ञानी और वॉलंटियर्स काम करते हैं। लोगों को फ्री सेवा दी जाती है। अमृतसर में एक ई रिक्शा को मॉडीफाई करके एम्बूलेंस भी बनाई गई है। हमारा हेल्पलाइन नम्बर भी है। देश भर से लोग फोन करके प्रॉब्लम का सॉल्यूशन मुफ्त में प्राप्त करते हैं। व्हाट्सएप नम्बर पर पौधे की फोटो भेजकर समस्या का समाधान भी पाया जा सकता है। हम लोगों को बताते हैं कि प्लांट की हेल्प कैसे करनी है। बेसिकली यह प्लांट पैरेंटिंग है।
वर्टिकल गार्डेन में यूज हुईं 75-80 टन प्लास्टिक की बोतलें
रोहित कहते हैं कि 8 से 9 वर्षों में 1000 जंगल बसाने का लक्ष्य था। मैं और मेरी पत्नी गीतांजलि ने अब तक 450 वन बसाए हैं। प्लास्टिक की बोतलों से 750 से ज्यादा वर्टिकल गार्डेन बनाएं। उसमें करीबन 75-80 टन प्लास्टिक यूज किया गया। जंगल बनाने में हम पहले पंचवटी (पीपल, बेल, वट, आंवला व अशोक) लगाते हैं। एक जंगल में 60 से 70 तरह के प्लांट लगाते हैं। पहले बड़े प्लांट फिर मीडियम साइज के प्लांट्स, उसके बाद कुछ जामुन वगैरह देसी फलों के पौधे, अश्वगंधा, तुलसी, गिलोय आदि भी लगाए जाते हैं। 8 से 9 महीने में पूरा जंगल डेवलप हो जाता है, जो आसपास के पूरे पॉल्यूशन को सोख लेते हैं। आपको बता दें कि देश का सबसे बड़ा वर्टिकल गार्डेन बनाने के लिए रोहित मेहरा का नाम लिम्का बुक आफ रिकार्ड में भी दर्ज है।
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