पुतिन-मोदी गले मिले तो टेंशन में आ गए US-चीन, भारत ने दुनिया को दिया ये खास संदेश

Rajkumar Upadhyaya |  
Published : Jul 11, 2024, 09:03 PM IST
पुतिन-मोदी गले मिले तो टेंशन में आ गए US-चीन, भारत ने दुनिया को दिया ये खास संदेश

सार

पीएम नरेंद्र मोदी की रूस यात्रा की इंटरेनशनल लेबल पर बड़ी चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि इस यात्रा से भारत-रूस संबंधों को नया शिखर मिला है।

नयी दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी की रूस यात्रा की इंटरेनशनल लेबल पर बड़ी चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि इस यात्रा से भारत-रूस संबंधों को नया शिखर मिला है। मॉस्को पहुंचते ही जिस तरह से पीएम मोदी का स्वागत हुआ, वह दोनों देशों के बीच गहरे संबंध बताता है। यात्रा पर पूरी दुनिया की निगाहें इसलिए थी, क्योंकि यूक्रेन-रूस वॉर के बाद पीएम मोदी की यह पहली रूस यात्रा थी।  

पुतिन-मोदी का गले मिलना पूरी दुनिया में चर्चा का विषय

मॉस्को में पीएम नरेंद्र मोदी को रूस के सर्वोच्च सम्मान से नवाजा गया। साथ ही उनकी आतिथ्य में भी कोई कसर नहीं छोड़ी गई। इसी वजह से यह यात्रा दोनों देशों के बीच विश्वास को और मजबूत बनाने वाला है। जिस तरह पीएम मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक दूसरे से गले मिले। यह पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना। साथ ही यह भारत की तरफ से रूस को एक खास मैसेज भी था कि पश्चिमी देशों के दबाव में बैलेंस बनाने के लिए सिर्फ चीन पर निर्भर रहना जरूरी नहीं।

बिना किसी गुट का हिस्सा बने, स्वतंत्र नीति पर चल रहा भारत

पीएम नरेंद्र मोदी की यह यात्रा कई मायनों में अहम रही। एक तरफ पश्चिमी देश यूक्रेन से युद्ध के बाद से ही रूस पर तमाम प्रतिबंध लगा चुके हैं और रूस को पूरी दुनिया से अलग थलग करने की मुहिम छेड़ रखी है। उस बीच पीएम मोदी की रूस यात्रा के बाद चर्चा हो रही है कि क्या भारत ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन को दुनिया में वापस ला दिया है। नीति का अहम बिंदु भी यही है कि बिना किसी गुट का हिस्सा बने अपनी स्वतंत्र नीति पर चला जाए। 

कूटनीति से अलग अतीत की विरासत का असर 

पीएम नरेंद्र मोदी की रूस यात्रा भारत-रूस के बीच सैन्य और आर्थिक सहयोग के दृष्टिकोण भी काफी अहम माना जा रहा है। यात्रा की नींव में मौजूदा दौर की कूटनीति से अलग अतीत की विरासत का भी असर है। एक समय था, जब अमेरिका समेत तमाम पश्चिमी देश पाकिस्तान को दुलार रहे थे। अफगानिस्तान में खेल चल रहा था। उस समय भी रूस भारत के साथ खड़ा था। 

आपसी विश्वास पर आधारित हैं भारत और रूस के संबंध

रूस ने ढांचागत निर्माण से लेकर सैन्य उपकरणों में भी भारत की मदद की। दोनों देशों के बीच अहम रक्षा विषयों पर सहयोग पूरी दुनिया ने देखा है। मतलब साफ है कि भारत ने एक बार फिर यह जता दिया है कि भारत और रूस के संबंध इतिहास और आपसी विश्वास पर आधारित हैं। जाहिर सी बात है कि आने वाले दिनों में भारत और रूस की दोस्ती और गहरी होगी।

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