Bus caught fire
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बस में अचानक लगी आग

फ़िरोज़ाबाद एनएच 2 पर यूपी रोडवेज के बस में अचानक आग लग गई। जिसके चलते पैसेंजर में अफरा तफरी मच गई। आनन फानन में लोगो ने बस से उतर कर अपनी जान बचाई यह हादसा तब हुआ जब बस शिकोहाबाद से फ़िरोज़ाबाद की तरफ आ रही थी तभी अचानक बस में आग लग गई। बाद में फायर ब्रिगेड की गाड़ी मौके पर पहुँची।
 

समाचार

उदासीनता के 3 दशक, अन्याय की 7 शताब्दियां, 1 सहस्राब्दी के बिना भरे घाव

30 साल बीच चुके हैं जब कश्मीरी हिंदुओं (पंडितों) को धर्मपरिवर्तन, पलायन या मरने के विकल्प दिए गए थे। आश्चर्य से अधिक मैं इस बात को सोचकर सिहर जाती हूं कि आखिर क्यों कश्मीरी हिंदुओं (पंडितों) के अंजाम से भारत के प्रत्येक नागरिक ने सबक नहीं सीखा?

Dimple Kaul

न्याय मांगते न्याय देने वाले अफसर

नौकरशाही में राजनैतिक दखल से परेशान होकर 1982 बैच के एक वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी अभय नारायण त्रिपाठी न्याय पाने के लिए कोर्ट चले गए हैं. हालांकि अब उन्होंने इस प्रकरण में कुछ भी कहने से इंकार दिया है, क्योंकि ये मामला कोर्ट में चल रहा है. 

Team MyNation

गरीब सवर्णों को आरक्षण राजनीतिक शिगूफा नहीं बल्कि एक दूरदर्शी सोच का नतीजा है

मोदी सरकार ने आर्थिक रुप से कमजोर लोगों को आरक्षण देने का फैसला किया है। विपक्ष इसे राजनीतिक दांव की संज्ञा दे रहा है और इसके समय पर सवाल उठा रहा है। ऐसा कहकर इस बेहद संवेदनशील और सामाजिक बदलाव लाने वाले फैसले की अहमियत कम की जा रही है। हम आपको बताएंगे कि कैसे गरीबों को दिया जाने वाला यह आरक्षण जातीय विभेदों में बंटे इस देश में धीमी किंतु बड़ी क्रांति का कारण बनेगा। यह महज एक राजनीतिक दांव नहीं बल्कि प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नजरिए का प्रतीक है।

Anshuman Anand

जीसस क्राइस्ट पर भारत के प्रभाव को नकारता क्यों है चर्च?

जीसस क्राइस्ट यानी ईसा मसीह का आज जन्मदिन है। एक महान संत और ईश्वरपुत्र के रुप में मानवता को उनकी देन असंदिग्ध है। लेकिन आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि जीसस मूल रुप से सनातन परंपरा के वाहक थे। उनके मूल विचार आर्य अष्टांगिक मार्ग से मेल खाते हैं। लेकिन इन बातों को जानबूझकर छिपाया गया और उसके मूल विचारों के उपर सेमेटिक(एक पैगंबर,एक किताब) विचारों का मुलम्मा चढ़ा दिया गया। ऐसा जीसस की मौत के रोमन सम्राट कॉन्सटेन्टाइन के जमाने में किया गया। ईसा की मौत के 325 साल बाद नायसिया(वर्तमान तुर्की) में एक परिषद् बुलाई गई, जिसमें जीसस के देवत्व की घोषणा की गई। जिसके बाद रोमन साम्राज्यवाद ने ईसा मसीह के व्यक्तित्व को अपना शासन फैलाने के नैतिक हथियार के रुप में इस्तेमाल करना शुरु कर दिया। प्रेम और दया के प्रतीक ईसा के नाम पर जो खूनी लड़ाईयां हुईं, वह इतिहास में ‘क्रूसेड’ के नाम से आज भी याद की जाती हैं। ऐसा करने के लिए जानबूझ कर जीसस का भारत से संबंध झुठलाया जाने लगा। जानिए जीसस पर भारत के प्रभाव के जुड़े ऐतिहासिक और अहम तथ्य़- 

Anshuman Anand