दिल्ली। बिहार के राजगीर में नालंदा विश्वविद्यालय के नए कैंपस का 19 जून 2024 को पीएम नरेंद्र मोदी ने उद्घाटन किया।  प्रधानमंत्री मोदी ने कैंपस में एक पट्टिका का अनावरण किया और एक पौधा भी लगाया। समारोह से पहले उन्होंने प्राचीन परिसर के खंडहरों का दौरा किया। गौरवशाली इतिहास से ताल्लुक रखने वाले नालंदा यूनिवर्सिटी के नए कैंपस की क्या-क्या खूबियां हैं। आईए बताते हैं। 

 

PM मोदी ने कहा, "नालंदा का हमारे गौरवशाली अतीत से गहरा नाता"
पीएम मोदी ने नालंदा विश्वविद्यालय के गौरवशाली अतीत पर प्रकाश डालते हुए अपने सोशल हैंडल एकाउंट X लिखा, "यह हमारे शिक्षा क्षेत्र के लिए बहुत खास दिन है। आज सुबह करीब 10:30 बजे राजगीर में नालंदा विश्वविद्यालय के नए परिसर का उद्घाटन किया। नालंदा का हमारे गौरवशाली अतीत से गहरा नाता है। यह विश्वविद्यालय निश्चित रूप से युवाओं की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करने में एक लंबा रास्ता तय करेगा।" नए कैंपस के उद्घाटन के बाद पीएम मोदी को नालंदा विश्वविद्यालय के अंतरिम कुलपति प्रोफेसर अभय कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर, बिहार के राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा शामिल हुए। इनके अलावा  17 देशों के राजदूत और अन्य प्रतिनिधि भी मौजूद थे।

 

देश की एजूकेशनल हिस्ट्री को संजोए नालंदा यूनिवर्सिटी में मिलेंगी ये सुविधाएं
लगभग 1,600 साल पहले स्थापित प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय को दुनिया के पहले आवासीय विश्वविद्यालयों में से एक माना जाता है। नया विश्वविद्यालय परिसर ऐतिहासिक नालंदा विश्वविद्यालय की प्रतिकृति के रूप में बनाया गया है। इस कैंपस में 40 क्लासरूम वाले दो एजूकेशनल ब्लॉक हैं, जिनकी कुल बैठने की कैपसिटी लगभग 1,900 है। इसमें 300 सीटों की कैपसिटी वाले 2 सभागार हैं। इसमें लगभग 550 छात्रों की कैपसिटी वाला एक हास्टल है। इसमें कई अन्य सुविधाएं भी हैं, जिनमें एक इंटरनेशलन सेंटर, एक एम्फीथिएटर जिसमें 2,000 लोगों तक की कैपसिटी है, एक फैकल्टी क्लब और एक खेल कैंपस भी शामिल हैं।

 

देश का पहला नेट जीरो ग्रीन कैंपस
यह परिसर एक 'नेट जीरो' ग्रीन कैंपस है। यह सोलर प्लांट्स, डोमेस्टिक एवं ड्रिंकिंग वाटर ट्रीटमेंट प्लांट,  वाटर रिसाइकिल प्लांट फार रियूज वेस्ट वाटर, 100 एकड़ वाटर बॉडीज और कई अन्य इको-फ्रैंडली सुविधाओं के साथ आत्मनिर्भर है। विश्वविद्यालय का कांसेप्ट भारत और पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (EAS) देशों के बीच सहयोग के रूप में किया गया है। इसका इतिहास से गहरा नाता है। चुनाव जीतने के बाद प्रधानमंत्री मोदी का यह पहला बिहार दौरा है।

 

नेट जीरो क्या है?
नेट जीरो का मतलब है कि किसी भी कार्बन उत्सर्जन को वायुमंडल से समान मात्रा में निकालकर संतुलित किया जाता है (एक तरह से रद्द कर दिया जाता है)। इसलिए हम नेट जीरो पर तब पहुँचेंगे जब हम जो कार्बन उत्सर्जन जोड़ते हैं, वह उससे ज़्यादा नहीं होगा जितना हम हटाते हैं। वायुमंडल से कार्बन हटाने के कई तरीके हैं। उदाहरण के लिए, आप ऐसे पेड़ लगा सकते हैं जो CO2 को अवशोषित करते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं। हालांकि, वायुमंडल से CO2 को हटाने की कोशिश करने के साथ-साथ, सबसे पहले वायुमंडल में डाली जाने वाली CO2 की मात्रा को कम करना भी महत्वपूर्ण है। ESO में  हम कोयले जैसे ऊर्जा स्रोतों पर अपनी निर्भरता कम करके ऐसा कर रहे हैं जो उच्च कार्बन उत्सर्जन करते हैं। इसके बजाय, हम पवन और सौर ऊर्जा जैसे स्रोतों का उपयोग बढ़ा रहे हैं, जो कोई कार्बन नहीं बनाते हैं। सिस्टम के कार्बन उत्सर्जन को कम करके हम ग्रेट ब्रिटेन को शुद्ध शून्य के व्यापक लक्ष्य तक पहुंचने में मदद कर रहे हैं।

 

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