Published : Jul 13, 2020, 07:36 AM ISTUpdated : Jul 13, 2020, 08:41 AM IST
भगवान शिव अर्थात पार्वती के पति शंकर जिन्हें महादेव, भोलेनाथ, आदिनाथ भी कहा जाता है। भगवान शिव को 'आदिदेव' भी कहा जाता है। क्योंकि 'आदि' का अर्थ प्रारंभ। यानी इस ब्राह्मांड की रचना भगवान शिव ने की है। भगवान शिव का धनुष पिनाक, चक्र भवरेंदु और सुदर्शन, अस्त्र पाशुपतास्त्र और शस्त्र त्रिशूल है। वहीं रुद्राक्ष और त्रिशूल को भी शिव का चिह्न माना गया है। कुछ लोग डमरू और अर्द्ध चन्द्र को भी शिव का चिह्न मानते हैं. वहीं शिवलिंग अर्थात शिव की ज्योति का की भी पूजा की जाती है।
भोले शंकर महादेव भगवान शिव के गले में जो नाग लिपटा रहता है उसका नाम वासुकि है और वह शेषनाग के छोटे भाई हैं।
भोले शंकर महादेव भगवान शिव के गले में जो नाग लिपटा रहता है उसका नाम वासुकि है और वह शेषनाग के छोटे भाई हैं।
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शिव की पहली पत्नी सती हैं और उन्होंने अगले जन्न में पार्वती का रूप लिया। मां पार्वती को उमा, उर्मि, काली भी कहा जाता है।
शिव की पहली पत्नी सती हैं और उन्होंने अगले जन्न में पार्वती का रूप लिया। मां पार्वती को उमा, उर्मि, काली भी कहा जाता है।
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भगवान शिव के छह पुत्र हैं। गणेश, कार्तिकेय, सुकेश, जलंधर, अयप्पा और भूमा को भगवान शिव का पुत्र कहा जाता है।
भगवान शिव के छह पुत्र हैं। गणेश, कार्तिकेय, सुकेश, जलंधर, अयप्पा और भूमा को भगवान शिव का पुत्र कहा जाता है।
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भगवान शिव के 7 शिष्य हैं और इन्हें सप्तऋषि भी कहा जाता है। जिन्होंने भगवान शिव के ज्ञान को संपूर्ण ब्रह्मांड प्रचारित किया।
भगवान शिव के 7 शिष्य हैं और इन्हें सप्तऋषि भी कहा जाता है। जिन्होंने भगवान शिव के ज्ञान को संपूर्ण ब्रह्मांड प्रचारित किया।
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भगवान शिव ने ही गुरु और शिष्य परंपरा की शुरुआत की थी। बृहस्पति, विशालाक्ष, शुक्र, सहस्राक्ष, महेन्द्र, प्राचेतस मनु, भरद्वाज को भगवान शिव का शिष्य माना जाता है और इनके अलावा गौरशिरस मुनि भी भगवान शिव के शिष्यों में हैं।
भगवान शिव ने ही गुरु और शिष्य परंपरा की शुरुआत की थी। बृहस्पति, विशालाक्ष, शुक्र, सहस्राक्ष, महेन्द्र, प्राचेतस मनु, भरद्वाज को भगवान शिव का शिष्य माना जाता है और इनके अलावा गौरशिरस मुनि भी भगवान शिव के शिष्यों में हैं।
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भगवान शिव के गणों भी हैं और भैरव, वीरभद्र, मणिभद्र, चंदिस, नंदी, श्रृंगी, भृगिरिटी, शैल, गोकर्ण, घंटाकर्ण, जय और विजय उनका प्रमुख गण माना जाता है। कहा जाता है कि शिवगण नंदी ने ही 'कामशास्त्र' की रचना की थी।
भगवान शिव के गणों भी हैं और भैरव, वीरभद्र, मणिभद्र, चंदिस, नंदी, श्रृंगी, भृगिरिटी, शैल, गोकर्ण, घंटाकर्ण, जय और विजय उनका प्रमुख गण माना जाता है। कहा जाता है कि शिवगण नंदी ने ही 'कामशास्त्र' की रचना की थी।
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भगवान शिव की पंचायत भी है। जिससें भगवान सूर्य, गणपति, देवी, रुद्र और विष्णु शामिल हैं। ये शिव पंचायत कहलाते हैं।
भगवान शिव की पंचायत भी है। जिससें भगवान सूर्य, गणपति, देवी, रुद्र और विष्णु शामिल हैं। ये शिव पंचायत कहलाते हैं।
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भगवान शिव के द्वारपाल भी हैं। भगवान शिव के द्वारपाल नंदी, स्कंद, रिटी, वृषभ, भृंगी, गणेश, उमा-महेश्वर और महाकाल शामिल हैं।
भगवान शिव के द्वारपाल भी हैं। भगवान शिव के द्वारपाल नंदी, स्कंद, रिटी, वृषभ, भृंगी, गणेश, उमा-महेश्वर और महाकाल शामिल हैं।
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बाण, रावण, चंड, नंदी, भृंगी आदि को भगवान भोलनाथ शिव का पार्षद माना जाता है। जबकि जय और विजय विष्णु के पार्षद हैं
बाण, रावण, चंड, नंदी, भृंगी आदि को भगवान भोलनाथ शिव का पार्षद माना जाता है। जबकि जय और विजय विष्णु के पार्षद हैं
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देवाधिदेव भगवान शिव को देवों के साथ असुर, दानव, राक्षस, पिशाच, गंधर्व, यक्ष पूजते हैं।
देवाधिदेव भगवान शिव को देवों के साथ असुर, दानव, राक्षस, पिशाच, गंधर्व, यक्ष पूजते हैं।
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रुद्राक्ष और त्रिशूल को भी शिव का चिह्न माना गया है। कुछ लोग डमरू और अर्द्ध चन्द्र को भी शिव का चिह्न मानते हैं. वहीं शिवलिंग अर्थात शिव की ज्योति का की भी पूजा की जाती है।
रुद्राक्ष और त्रिशूल को भी शिव का चिह्न माना गया है। कुछ लोग डमरू और अर्द्ध चन्द्र को भी शिव का चिह्न मानते हैं. वहीं शिवलिंग अर्थात शिव की ज्योति का की भी पूजा की जाती है।
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जहां भगवान शिव रावण को भी वरदान देते हैं वहीं विश्व के कल्याण के लिए वह भगवान राम को भी वरदान देते हैं। शिव, सभी आदिवासी, वनवासी जाति, वर्ण, धर्म और समाज के सर्वोच्च देवता हैं।
जहां भगवान शिव रावण को भी वरदान देते हैं वहीं विश्व के कल्याण के लिए वह भगवान राम को भी वरदान देते हैं। शिव, सभी आदिवासी, वनवासी जाति, वर्ण, धर्म और समाज के सर्वोच्च देवता हैं।
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