जम्मू-कश्मीर में आतंकियों का खात्मा जारी, पहले पांच महीने में 101 ढेर

Published : Jun 02, 2019, 05:35 PM ISTUpdated : Jun 02, 2019, 05:36 PM IST
जम्मू-कश्मीर में आतंकियों का खात्मा जारी, पहले पांच महीने में 101 ढेर

सार

2019 में 31 मई तक 101 आतंकी मारे गए जिनमें 23 विदेशी और 78 स्थानीय आतंकी शामिल हैं। इनमें अल-कायदा से जुड़े समूह अंसार गजवत-उल-हिंद का सरगना जाकिर मूसा शामिल है।

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों की ओर से आतंकियों का सफाया जारी है। साल 2019 के पहले पांच महीने में ही राज्य में 100 से ज्यादा आतंकियों को ढेर किया जा चुका है। इनमें 23 विदेशी आतंकी शामिल हैं। हालांकि आतंकी संगठनों में भर्ती होने के ट्रेंड ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। 

अधिकारियों के मुताबिक, मार्च महीने के बाद 50 युवक अनेक आतंकी संगठनों में शामिल हो चुके हैं। सुरक्षा एजेंसियों को उन तक जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति रोकने का बेहतर तरीका खोजना होगा।

अधिकारियों ने कहा कि राज्य में 2019 में 31 मई तक 101 आतंकी मारे गए जिनमें 23 विदेशी और 78 स्थानीय आतंकी शामिल हैं। इनमें अल-कायदा से जुड़े समूह अंसार गजवत-उल-हिंद का सरगना जाकिर मूसा शामिल है। मारे गए आतंकवादियों में सर्वाधिक संख्या शोपियां से है, जहां 16 स्थानीय आतंकियों समेत 25 आतंकवादी मारे गए। पुलवामा में 15, अवंतीपुरा में 14 और कुलगाम में 12 आतंकी मारे गए।

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हालांकि अधिकारियों के मुताबिक, हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकियों के अंसार गजवत-उल-हिंद में शामिल होने के मामले बढ़ गए हैं। 23 मई को मूसा के मारे जाने के बाद खासतौर पर ये मामले देखे गए हैं।

आतंकवाद से मुकाबला करने या इसके लिए रणनीति बनाने में शामिल अधिकारियों का मानना है कि आतंकवाद निरोधक नीति पर पुनर्विचार की जरूरत है। इसके अलावा युवाओं को आतंकवाद की बुराइयां समझाने के लिए उनके तथा उनके माता-पिता के साथ बात करने की जरूरत है।

हालांकि दक्षिण कश्मीर के इन अति संवेदनशील क्षेत्रों से युवाओं के विभिन्न आतंकी समूहों में शामिल होने का सिलसिला भी जारी है। अधिकारियों ने कहा कि घुसपैठ भी बढ़ रही है और कुछ आतंकी जम्मू क्षेत्र के पुंछ और राजौरी जिलों तथा कश्मीर घाटी में एलओसी  से आतंकी घुसपैठ में सफल रहे। इससे सुरक्षा बलों के लिए बहुत चिंताजनक स्थिति पैदा हो गई है, जो खुद को इस महीने के आखिर में शुरू हो रही अमरनाथ यात्रा के लिए तैयार कर रहे हैं।

घाटी में 2010-2013 की तुलना में 2014 से युवाओं के हथियार उठाने के मामले बढ़े हैं। पुलवामा में 14 फरवरी के आतंकी हमले के बाद आतंकवादियों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ के बाद स्थानीय लोगों के प्रदर्शन तथा पथराव देखे गए। आतंकियों को सुपुर्दे खाक करते समय भी बड़ी संख्या में लोग जमा हुए। पूरे घटनाक्रम से ऐसा माहौल बन सकता है, जो नए आतंकियों की भर्ती के लिए मुफीद बन जाए। (इनपुट एजेंसी)
 

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