आखिर क्यों यांकी के इशारों पर नाचते हैं ओली और थापा

Published : Jul 04, 2020, 10:24 AM IST
आखिर क्यों यांकी के इशारों पर नाचते हैं ओली और थापा

सार

नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार में चीनी राजदूत का प्रभाव इस बात से समझा जा सकता है कि उसका पीएम और राष्ट्रपति कार्यालय से लेकर आवास में सीधा दखल है। नेपाल के नीति निर्धारण में अब यांकी का दखल बढ़ गया है।

काठमांडू। नेपाल में प्रधानमंत्री केपी शर्मा औली और सेना प्रमुख जनरल पूर्णचंद्र थापा के दफ्तर तक चीन की राजदूत होउ यांकी का सीधा दखल है। यांकी के बारे में कहा जाता है कि नेपाल में वह जो चाहती है नेपाल की सरकार उसे करने के लिए तत्पर रहती है। यांकी नेपाल के किसी भी क्षेत्र और कार्यालय में में बेरोकटोक आ-जा सकती हैं। यहीं तक कि उसके नेपाल के पीएम और राष्ट्रपति कार्यालय और आवास पर सीधी एंट्री होती है।

असल में ये तय हो चुका है कि नेपाल के पीएम केपी शर्मा ओली चीन की गोद में जाकर बैठ गए हैं और चीन के इशारों पर भारत के खिलाफ साजिश कर रहे हैं। अब ये केवल मीडिया और राजनैतिक दलों के आरोप नहीं बल्कि ये अब नेपाल का बच्चा बच्चा समझ गया है कि नेपाल में ओली देश के हितों को दरकिनार कर भारत विरोधी अभियान चला रहे हैं और इसके बीच चीन की साजिश है और इस साजिशों को नेपाल में अमली जामा वहां की राजदूत होउ यांकी पहना रही है।

नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार में चीनी राजदूत का प्रभाव इस बात से समझा जा सकता है कि उसका पीएम और राष्ट्रपति कार्यालय से लेकर आवास में सीधा दखल है। नेपाल के नीति निर्धारण में अब यांकी का दखल बढ़ गया है। राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी यांकी को विशेष भोज पर आमंत्रित करती हैं जबकि देश के पर्यटन मंत्री योगेश भट्टराई और अन्य मंत्री यांकि के साथ फोटो खिंचाकर अपने को धन्य समझते हैं।

असल में यांकी की सबसे खास बात ये है कि वह राजदूत होने के साथ ही एक मॉडल की तरफ दिखती है और नेपाल के नेपाल के वरिष्ठ नेताओं और अफसरों के साथ अपने फोटो को सोशल मीडिया पर शेयर करती है। यांकी नेपाल में अपने इशारों पर सरकार से लेकर सेना को नचा रही है और भारत विरोध साजिश में सभी दलों के नेताओं को शामिल करने में लगी हुई है। नेपाल में चर्चा है कि यांकी के ओली और वरिष्ठ नेताओं के साथ करीबी संबंध हैं। लिहाजा ये नेता उसके इशारों पर नाचने के लिए तैयार हैं। 

नेपाल के नीतिगत मामलों में भी चीनी राजदूत यांकी का असर देखा जा रहा रहा है और भारत के प्रति बदले रुख के पीछे भी यांकी को ही साजिशकर्ता को माना जा रहा है। बताया जा रहा कि हालांकि भारतीय क्षेत्रों लिपुलेख, कालापानी व लिपियाधूर नेपाल के नक्शे में शामिल करने का फैसला नेपाल की सरकार ने किया। लेकिन इसकी रूपरेखा बीजिंग और यांकी के कार्यालय में ही बनी। वहीं नेपाल की सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) में दोनों गुटों को मनाने के लिए भी यांकी ने सभी नेताओं से मुलाकात की ताकि चीन का विरोध देश में हो सके।

 यांकी के दखल और पीएम ओली पर प्रभाव को इसी बात से देखा जा सकता है कि वह ओली के साथ ही एनपीसी के चेयरमैन व नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड से मिली और दोनों को आपस में न लड़ने की सलाह भी दी।

सेना प्रमुख से भी करीबी संबंध

बताया जाता है कि यांकी को नेपाली सेना के प्रमुख पूर्णचंद्र थापा से भी करीबी संबंध हैं और इस बात का सबूत है कि जब 13 मई यांकी ने थापा को चीनी सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के एक कार्यक्रम के आयोजन में मुख्य अतिथि बुलाया था।

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