
नई दिल्ली। चीन के प्यादे पाकिस्तान ने नेपाल को समर्थन देने का फैसला किया है। चीन की गोद में जा बैठे नेपाल पीएम केपी शर्मा ओली को पाकिस्तान प्रधानमंत्री इमरान खान नियाजी ने नक्शे में भारतीय हिस्सों को शामिल करने के लिए समर्थन दिया है। माना जा रहा है कि चीन की रणनीति के तहत नियाजी ने नेपाल से बातचीत करने का फैसला किया है। ताकि वह भारत को कमजोर करने के लिए ये जताए कि वह तीन तरफ से घिर गया है।
नेपाल के पीएम केपी शर्मा ओली चीन के साजिश का शिकार बन चुके है और नेपाल में चर्चा है कि नेपाली पीएम ने देश के हितों को दरकिनार कर चीन का समर्थन किया है। पिछले दिनों हांगकांग के मुद्दे पर नेपाली पीएम ने चीन का समर्थन किया है। वहीं नेपाली पीएम अपनी ही पार्टी में अलग-थलक पड़ गए हैं और इसके लिए उन्होंने भारत सरकार को दोषी ठहराया है। वहीं नेपाली पीएम ने कहा कि भारत ने लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा पर कब्जा किया किया है और उनके नक्शे में संसोधन के प्रस्ताव पर भारत उन्हें सत्ता से बेदखल करना चाहता है।
वहीं ओली के धुर विरोधी पूर्व पीएम पुष्प कमल दहल प्रचंड ने कहा कि ओली जिस तरह के आरोप लगा रहे हैं अगर वह इन आरोपों का साबित नहीं करते हैं तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए। वहीं अब भारत और नेपाल के विवाद के बीच पाकिस्तान के पीएम इमरान खान नियाजी भी कूद गए हैं और उन्होंने नेपाली पीएम से बात करने का प्रस्ताव रखा है और मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इमरान खान नियाजी नेपाली पीएम से 9 जुलाई को फोन पर बातचीत करेंगे।
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