कश्मीर में सेना की 'डबल सेंचुरी', 19 घंटे में 8 आतंकवादी ढेर

Gursimran Singh |  
Published : Oct 26, 2018, 12:41 PM IST
कश्मीर में सेना की  'डबल सेंचुरी', 19 घंटे में 8 आतंकवादी ढेर

सार

इस साल यह आंकड़ा अब तक 201 हो चुका है। वर्ष 2017 में सुरक्षा बलों ने कुल 213 आतंकियों का सफाया किया था। वहीं 2016 में यह संख्या 150 थी। 

जम्मू-कश्मीर से आतंकवाद के खात्मे के लिए सेना का ऑपरेशन ऑलआउट और तेज हो गया है। सेना ने शुक्रवार सुबह दो और आतंकियों को मार गिराया। इसके साथ ही सेना ने वर्ष 2018 में ढेर किए गए आतंकियों का आंकड़ा दो सौ के पार पहुंचा दिया है। पिछले 19 घंटे में सुरक्षा बलों द्वारा 8 आतंकियों का खात्मा किया गया है। इस साल यह आंकड़ा अब तक 201 हो चुका है। वर्ष 2017 में सुरक्षा बलों ने कुल 213 आतंकियों का सफाया किया था। वहीं 2016 में यह संख्या 150 थी। 

जम्मू-कश्मीर में स्थानीय निकायों के चुनाव खत्म हो जाने के बाद आतंकवाद रोधी अभियानों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य में 13 साल बाद स्थानीय निकायों के चुनाव संपन्न हुए। इस दौरान आतंकवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की रफ्तार थोड़ी थम गई थी। लेकिन चुनावी प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसमें काफी तेजी आई है। 

सेना, राज्य पुलिस और अन्य बलों की संयुक्त टीमों ने 19 घंटे में ताबड़तोड़ एनकाउंटर किए हैं। दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग से उत्तर कश्मीर के बारामुला तक हुए तीन अलग-अलग एनकाउंटर में 8 स्थानीय और पाकिस्तानी आतंकी मारे गए हैं। बृहस्पतिवार को बारामुला में दो जबकि अनंतनाग में चार आतंकी मार गिराए गए। वहीं सोपोर में शुक्रवार सुबह हुई मुठभेड़ में दो आतंकियों को ढेर कर दिया गया। 

सेना की ओर से चलाए जा रहे अभियानों में रणनीति के तौर पर भी बदलाव देखने को मिला है। इन सभी अभियानों के दौरान सुरक्षा बलों को कोई गंभीर नुकसान नहीं पहुंचा। सेना कश्मीर में अपने जवानों को सुरक्षित रखने के लिए इजराइल की तकनीक अपना रही है।

'माय नेशन' ने एक दिन पहले ही सेना द्वारा अपनाई जा रही नई रणनीति का खुलासा किया था। रिहायशी इलाकों में चलाए जाने वाले अभियानों के दौरान सेना इजराइली रणनीति को अपना रही है। किसी बड़े नुकसान को टालने के लिए सेना अब फ्लेम बरनर (आग) का इस्तेमाल कर रही है। 

यह भी पढ़ें - कश्मीर में सेना इजरायली तकनीक से कर रही आतंकवादियों पर प्रहार

सेना अब उन आतंकियों को निशाना बना रही है, जो कश्मीरी युवाओं को आतंकवाद की राह में धकेल रहे हैं। 2018 में कई ऐसे आतंकी कमांडर या तो मार दिए गए हैं या गिरफ्तार किए गए हैं, जो स्थानीय युवकों को आतंकी संगठनों में भर्ती कर रहे हैं। उन्हें आतंकी वारदात को अंजाम देने के लिए हथियार मुहैया करा रहे हैं। 
 

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