ममता vs सीबीआईः जेटली बोले, कमिश्नर को बचाने नहीं, खुद को विपक्ष का नेता बनाने को है ममता का धरना

Published : Feb 05, 2019, 10:24 AM IST
ममता vs सीबीआईः जेटली बोले, कमिश्नर को बचाने नहीं, खुद को विपक्ष का नेता बनाने को है ममता का धरना

सार

केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने 'द क्लेपटोक्रेट क्लब' शीर्षक वाले अपने फेसबुक पोस्ट में चिटफंड घोटाले और इसकी जांच पर विस्तार से लिखा है। पश्चिम बंगाल का चिटफंड फर्जीवाड़ा 2012-13 में सामने आया था। 

कोलकता में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी के धरने को  लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने अपने फेसबुक ब्लॉग में लिखा है कि ममता बनर्जी जो सियासी दांव खेल रही हैं, उसका मकसद कोलकाता के कमिश्नर को बचाना नहीं बल्कि विपक्ष के अपने प्रतिद्वंदियों के बीच में खुद को पीएम पद के लिए सबसे आगे करने का प्रयास है। जेटली ने कहा है कि एक क्लेपटोक्रेट क्लब भारत पर शासन करना चाहता है। यानी एक ऐसा शासक जो अपनी ताकत के इस्तेमाल से देश के संसाधनों का दोहन करता है। 

जेटली ने 'द क्लेपटोक्रेट क्लब' शीर्षक वाले अपने फेसबुक पोस्ट में चिटफंड घोटाले और इसकी जांच पर भी विस्तार से लिखा है। जेटली लिखते हैं,  पश्चिम बंगाल का चिटफंड फर्जीवाड़ा 2012-13 में सामने आया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी। सीबीआई ने कई लोगों से पूछताछ की और कई को गिरफ्तार किया। इस मामले में कई लोग अभी जमानत पर हैं।  अगर किसी पुलिस अधिकारी से पूछताछ की जरूरत है तो यह 'सुप्रीम इमरजेंसी', 'संघवाद पर हमला' था 'संस्थानों का विनाश' कैसे हो सकता है? मुख्यमंत्री की इस शर्मनाक और अप्रमाणिक प्रतिक्रिया के पीछे क्या रणनीति हो सकती है? अपने धरने में सभी विपक्षी दलों को बुलाने के पीछे की मंशा क्या है? यह सोचना गलत होगा कि ममता बनर्जी ने एक पुलिस अधिकारी से जांच को लेकर धरना दिया है। ममता बनर्जी ऐसा इसलिए कर रही हैं ताकि विपक्ष में अपने दूसरे प्रतिद्वंदियों में वो खुद को पीएम पद के लिए सबसे आगे कर सके। प्रधानमंत्री पर हमला करना उनकी एक रणनीति है। इसके माध्यम से वे अपने साथ के लोगों को साइड कर खुद को केंद्र में रखना चाहती हैं। 

जेटली लिखते हैं, संघीय व्यवस्था कोई नारा नहीं है। यह केंद्र-राज्य संबंधों के बीच का एक नाजुक संतुलन है। हमारे संविधान में केंद्र और राज्य सरकार के बीच काम करने के तरीके को साफ तौर पर लिखा गया है। कोई इस सीमा को नहीं लांघता। देश में कई केंद्रीय एजेंसी और संस्थाएं हैं जो राज्यों में जांच करती हैं। 

उन्होंने लिखा, पश्चिम बंगाल में सीबीआई को अपने अधिकारक्षेत्र में आने वाले मामले की जांच करने से बलपूर्वक रोका गया और उसके अधिकारियों को हिरासत में लिया गया। यह एक ऐसा मामला है जिसमें राज्य ही देश के संघीय ढांचे पर हमला कर रहा है। क्या इनकम टैक्स विभाग को एक राज्य सरकार टैक्स वसूलने से रोक सकती है, क्या कोई राज्य सरकार एनआईए को उस राज्य में मौजूद आतंकवादियों को पकड़ने से रोक सकती है, क्या कोई राज्य सरकार ईडी को उस राज्य में मौजूद स्मगलर और मनी लॉन्ड्रिंग करने वालों की जांच करने और उसे गिरफ्तार करने से रोक सकती है? इसका उत्तर बिल्कुल 'ना' है। अगर इनमें से कुछ भी होता नजर आता है तो यह राज्य की ओर से संघीय ढांचे पर प्रहार है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जांच करने गई केंद्रीय एजेंसी को रोकना देश के संघीय ढांचे पर सीधा प्रहार है।

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