
हैदराबाद। अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह की तैयारियां युद्ध स्तर पर की जा रही हैं। मंदिर के दरवाजे बनाने का काम तमिलनाडु के कारीगरों द्वारा किया जा रहा है। दरवाजे नागर शैली में बनाए जा रहे हैं। उन पर पारंपरिक भारतीय चित्रकला को भी प्रदर्शित किया जाएगा। जिसमें कमल, मोर और अन्य पक्षियों के चित्र होंगे।
17 दरवाजे तैयार कर रही कंपनी
जानकारी के अनुसार, रामलला के मंदिर के दरवाजे बना रही हैदराबाद की कंपनी को मंदिर का एक मॉडल बनाने के लिए कहा गया था। जिसके बाद उन्हें दरवाजों का काम सौंपा गया। कंपनी 17 दरवाजे तैयार करने का काम कर रही है। जनवरी में इन दरवाजों को पवित्र किया जाएगा। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का समय नजदीक है। यह देखते हुए दरवाजों पर तेजी से काम चल रहा है। मंदिर के ग्राउंड फ्लोर का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। डेकोरेशन का काम चल रहा है।
दरवाजों की ऊंचाई 8 फीट और चौड़ाई 12 फीट
गर्भगृह में लगाए जा रहे दरवाजों की ऊंचाई 8 फीट और चौड़ाई 12 फीट होगी। दरवाजे 6 इंच मोटे भी होंगे। मुख्य मंदिर के 18 दरवाजे बनाए जा चुके हैं। मंदिरों के चारों तरफ लगाई जाने वाली 100 चौखटें तैयार हैं। हालांकि दरवाजों की संख्या बढ़ भी सकती है। तमिलनाडु के कारीगर राम मंदिर के दरवाजे बनाने का काम कर रहे हैं।
नागर शैली में तैयार हो रहे दरवाजे
आपको बता दें कि नागर मंदिर वास्तुकला गुप्त काल में शुरु हुई थी। मुगलों के आक्रमण तक मंदिर बनाने की यह वास्तुकला जारी रही। इसे वास्तुकला की उत्तर भारतीय शैली भी कहा जाता है। दरवाजे बनाने के लिए इस उद्योग से जुड़े नामी गिरामी लोगों को बुलाया गया था। उन लोगों से बातचीत करने के बाद दरवाजे बनाने का काम हैदराबाद की कंपनी अनुराधा टिंबर्स इंटरनेशनल को मिला।
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