सपा संरक्षक को लेकर माया हुई 'मुलायम', मैनपुरी में करेंगी चुनाव प्रचार

By Team MyNationFirst Published Mar 15, 2019, 3:08 PM IST
Highlights

उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव दिलचस्प होने वाला है। सपा-बसपा के बीच करीब बाइस साल के बाद गठबंधन बन जाने के बाद अब मायावती सपा संरक्षक और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के लिए चुनाव प्रचार करेंगी।

उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव दिलचस्प होने वाला है। सपा-बसपा के बीच करीब बाइस साल के बाद गठबंधन बन जाने के बाद अब मायावती सपा संरक्षक और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के लिए चुनाव प्रचार करेंगी। मुलायम सिंह के मुख्यमंत्री रहते हुए राजधानी लखनऊ में गेस्ट हाउस कांड हुआ था और मायावती इसके लिए मुलायम सिंह यादव को दोषी मानती हैं।

लोकसभा चुनाव के आगाज होते ही लगता है मुलायम सिंह और मायावती के बीच तल्ख रिश्ते बेहतर होते दिख रहे हैं। राज्य में लोकसभा चुनाव के लिए सपा और बसपा के बीच चुनाव गठबंधन हुआ है और दोनों दल अगले महीने नवरात्र से राज्य में चुनाव प्रचार शुरू करेंगे। ऐसा कहा जा रहा है कि मायावती और अखिलेश यादव राज्य में 12 लोकसभा सीटों पर संयुक्त तौर पर प्रचार करेंगे और इसमें मैनपुरी की सीट भी फाइनल है। जहां से सपा संरक्षक और मायावती के कट्टर प्रतिद्वंदी रहे मुलायम सिंह यादव चुनाव लड़ रहे हैं। राजधानी लखनऊ में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि मायावती 19 अप्रैल को मुलायम के गढ़ मैनपुरी में प्रचार करेंगी और उनके लिए वोट मांगेगी। हालांकि बसपा की तरफ से इस बारे में कोई पुष्टि नहीं की है।

लेकिन ये चर्चा जरूरी है कि अपने वोटरों को मैसेज देने के लिए मायावती ने इसके लिए हामी भर दी है। ताकि सपा और बसपा का वोटर एक साथ आ सके। ऐसा कहा जा रहा है कि समाजवादी पार्टी ने महागठबंधन के लिए संयुक्त तौर पर चुनाव प्रचार कार्यक्रम तैयार किया है। उसके तहत दोनों की मैनपुरी में रैली प्रस्तावित है। मैनपुरी में रैली करने का मकसद सपा के वोट बैंक को एकजुट रखना है। क्योंकि मैनपुरी में मुलायम सिंह को टिकट देने के साथ ही वहां पर उनका विरोध शुरू हो गया था और सपा ने वहां के जिलाध्यक्ष को पार्टी से बाहर कर दिया है। यहां पर ज्यादातर नेता तेज प्रताप यादव को टिकट दिए जाने के पक्ष में है।

जानें कब हुआ था गेस्ट हाउस कांड

उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव ने सन् 1992 में जनता दल से अलग हो कर समाजवादी पार्टी बनाई थी। 1992 में बाबरी मस्जिद को गिराने के आरोप में केन्द्र सरकार ने उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में भाजपा की सरकार को बर्खास्त कर दिया था। इसके बाद भाजपा को रोकने के लिए मुलायम सिंह ने बसपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ा और सरकार बनाने में कामयाब रहे। लेकिन इसी बीच बसपा की भाजपा के साथ दूरियां कम होने लगी है और बसपा ने मुलायम सिंह सरकार से समर्थन वापस ले लिया। लेकिन मुलायम सिंह यादव की सरकार को बचाने के लिए विधायकों के जोड़-तोड़ का सिलसिला शुरू हुआ।

इस बीच सपा के नाराज विधायक और कार्यकर्ता मीराबाई मार्ग स्थित स्टेट गेस्ट हाउस पहुंच गए। जहां पर मायावती नेताओं के साथ बातचीत कर रही थी। ऐसा कहा जाता है कि वहां पर सपा नेताओं ने मायावती के साथ बदसलूकी की। मायावती ने अपने आप को गेस्ट हाउस के एक कमरे में बंद कर दिया था। बाद में भाजपा नेता बह्रमदत्त द्विवेदी ने अपने समर्थकों के साथ मायावती को कमरे से सुरक्षित बाहर निकाला। इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इस प्रकरण को यूपी की सियासत में गेस्ट हाउस कांड के तौर पर जाना जाता है।

click me!