आंध्र की सत्ता पर काबिज है बेटा और पिता के जरिए राज्य में सियासी जमीन तलाशने की तैयारी जुटी कांग्रेस, जानें क्या है मामला

Published : Sep 02, 2019, 02:33 PM IST
आंध्र की सत्ता पर काबिज है बेटा और पिता के जरिए राज्य में सियासी जमीन तलाशने की तैयारी जुटी कांग्रेस, जानें क्या है मामला

सार

आज आंध्रप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी की 10वीं पुण्यतिथि है। वाईएसआर के बेटे वाईएस जगनमोहन रेड्डी राज्य के सीएम हैं। उन्होंने कुछ साल पहले कांग्रेस से अलग होकर वाईएसआर कांग्रेस पार्टी का गठन किया था। जो इस साल मई में हुए विधानसभा चुनाव में टीडीपी को हराकर राज्य की सत्ता पर काबिज हुई है।

नई दिल्ली। आंध्रप्रदेश में पूरी तरह से जमीन खो चुकी कांग्रेस अब राज्य में फिर से सत्ता पर काबिज होने के लिए फिर से जमीन तलाशने की तैयारी में जुट गई है। कांग्रेस राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी के पिता की 10वीं पुण्यतिथि मना रही है। इसके लिए राज्य में कई बड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। जबकि राज्य में वाईएसआर कांग्रेस बन जाने के बाद कांग्रेस पार्टी का राज्य से सफाया हो गया है।

असल में कांग्रेस ने इसके जरिए तीर से दो निशाने साधने की कोशिश की है। इस तो वह राज्य के पुराने कांग्रेसियों को इसके जरिए ये बताना चाहती है कि कांग्रेस आज भी वाईएसआर का सम्मान करती है जबकि दूसरी तरफ वह जगनमोहन रेड्डी को भी इसके जरिए साधना चाहती है। आज आंध्रप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी की 10वीं पुण्यतिथि है।

वाईएसआर के बेटे वाईएस जगनमोहन रेड्डी राज्य के सीएम हैं। उन्होंने कुछ साल पहले कांग्रेस से अलग होकर वाईएसआर कांग्रेस पार्टी का गठन किया था। जो इस साल मई में हुए विधानसभा चुनाव में टीडीपी को हराकर राज्य की सत्ता पर काबिज हुई है।

आंध्रप्रदेश के कांग्रेस प्रभारी सीडी मेयप्पन का कहना है वाईएसआर कांग्रेस के नेता था और उनकी राजनीतिक विरासत की हकदार कांग्रेस है। जबकि जगनमोहन रेड्डी उनके पारिवारिक विरासत के उत्तराधिकारी हैं। गौरतलब है कि वाईएसआर की मौत साल 2009 में एक एयरक्रैश में हो गई थी। वह 2004 और 2009 में राज्य में हुए चुनावों में कांग्रेस की जीत के नायक थे लेकिन बाद में उनका निधन हो गया था।

 फिलहाल राज्य की सत्ता पर जगनमोहन रेड्डी की पार्टी का गठन होने और सत्ता पर काबिज होने के बाद कांग्रेस के कई विधायकों ने वाईएसआर का दामन थामा और राज्य में एक तरह से कांग्रेस पूरी तरह से खत्म हो गई है। वहीं 2014 में तेलंगाना के अस्तित्व में आने के बाद विधानसभा और लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को हार मिली है। लिहाजा राज्य में कांग्रेस एक बार फिर खुद को मजबूत करने की कोशिश में है।

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