
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस युवा और पहली बार विधायक बने नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं करेगी। पार्टी पुराने और अनुभवी नेताओं को तरजीह देगी। बघेल सरकार में अभी दस 10 कैबिनेट मंत्री हो सकते हैं। ऐसा माना जा रहा है कि कांग्रेस आलाकमान से मंजूरी मिलने के बाद 25 या 26 दिसंबर को मंत्रिमंडल का विस्तार किया जाएगा। हालांकि नए विधायकों को कैबिनेट और राज्यमंत्री का दर्जा देकर खुश किया जाएगा।
कांग्रेस ने राज्य में पहली बार विधायक बनने वाले नेताओं को मंत्रिमंडल से बाहर रखने का फैसला किया है। राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इन युवा विधायकों को निगमों और प्राधिकरणों में कैबिनेट मंत्री या राज्य मंत्री का दर्जा देकर उपकृत करेंगे। लेकिन अपने मंत्रिमंडल में शामिल नहीं करेंगे। दो दिन दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान से लंबी बैठक करने और उसके बाद मंजूरी मिलने के बाद बघेल अगले एक-दो दिन में मंत्रिमंडल का विस्तार करेंगे। फिलहाल विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के नाम तय हो गए हैं।
गौरतलब है कि भूपेश बघेल ने अपने दो मत्रियों के साथ राज्य में पांचवे मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की हरी झंडी के बाद लिस्ट फाइनल कर दी गई है। ऐसा माना जा रहा है कि छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में कांग्रेस एक ही फार्मूला लागू करेगी और इसके तहत पहली बार जीतकर आए विधायकों को मंत्री नहीं बनाया जाएगा। जबकि दो से सात बार तक विधानसभा चुनाव जीतने वाले विधायक मंत्रिमंडल में जगह पाने के लिए तैयार बैठे हैं।
प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया मंगलवार को रयपुर जाएंगे और शपथ ग्रहण के दिन ही मंत्रियों के नाम घोषित किए जाएंगे। बघेल सरकार आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए मंत्रिमंडल का विस्तार करेगी और इसके लिए जातीय समीकरण को ध्यान में रखा गया है। मंत्रिमंडल में एससी, एसटी, ओबीसी , सामान्य के अलावा एक अल्पसंख्यक और एक महिला को कैबिनेट में जगह दी जाएगी। राज्य में विधानसभा अध्यक्ष के लिए चरणदास महंत का नाम तय माना जा रहा है।
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