
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव से जारी हुए आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश के हर विधायक के पास औसतन सवा पांच(5.25) करोड़ रुपए की संपत्ति है। जबकि 2008 के विधानसभा चुनाव में निर्वाचित हुए विधायकों की औसत संपत्ति करीब डेढ़(1.5) करोड़ रुपए थी।
यानी पिछले दस सालों में विधायकों की औसत संपत्ति लगभग चार गुनी बढ़ गई है। इस रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक मध्य प्रदेश के 72(बहत्तर) फीसदी विधायक करोड़पति हैं।
साल 2008 के मुकाबले साल 2013 में मध्यप्रदेश विधानसभा में करोड़पति विधायकों की संख्या 34 फीसदी बढ़ गई थी।
साल 2008 में सिर्फ 84 विधायक करोड़पति थे। जबकि साल 2013 की विधानसभा में 161 विधायक करोड़पति हैं।
एक दिलचस्प आंकड़ा यह भी है कि संपत्ति के मामले में सत्ता और प्रतिपक्ष यानी बीजेपी-कांग्रेस दोनों के विधायक लगभग बराबर हैं। बीजेपी विधायकों की औसत संपत्ति साढ़े पांच(5.5) करोड़ रुपए है जबकि कांग्रेस विधायकों की औसत संपत्ति पांच करोड़ रुपए है।
यानी सत्ता के अंदर हों या बाहर विधायकों की संपत्ति पर ज्यादा असर नहीं पड़ता।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सबसे धनी विधायक बीजेपी के संजय पाठक हैं। उनकी संपत्ति 141 करोड़ रुपए हैं।
जबकि सबसे कम संपत्ति वाली विधायक इंदौर की उषा ठाकुर हैं। जिनकी संपत्ति 1.38 लाख रुपए है।
वहीं 19 विधायकों की संपत्ति की जानकारी नहीं मिल पाई। क्योंकि उन्होंने पैन कार्ड नंबर नहीं दिए।
मध्य प्रदेश एलेक्शन वाच ने यह रिपोर्ट नेताओं के चुनावी हलफनामे के आधार पर तैयार की है।
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