
नई दिल्ली। हरियाणा के भदाना गांव के शिक्षक को अपनी बेटियों में मां देवी नजर आती हैं। क्योंकि ये बेटियां बेटों से आगे हैं और देश विदेश में अपने पिता के साथ ही देश का नाम भी रौशन कर रही हैं। छह बेटियां के पिता अपनी बेटियों की सफलता से खुश हैं और उन लोगों के लिए एक उदाहरण हैं जो बेटा और बेटियों में भेद करते हैं। अब ये बेटियां बेटों से भी आगे निकल गई हैं और छह में से चार बेटियां विदेशों में रहकर शोध कर रही हैं जबकि दो बेटियां विश्वविद्यालयों में शोध प्रोफेसर हैं।
हरियाणा के सोनीपतत के गांव भदाना के प्राथमिक विद्यालय में मुख्य अध्यापक जगदेव दहिया की छह बेटियां हैं। लेकिन उन्होंने कभी अपनी बेटियों को बोझ नहीं समझा बल्कि उन्हें देवी का ही रूप माना। जहां लोग अपनी बेटियों की पढ़ाई के खिलाफ थे, वहीं दहिया ने अपनी बेटियों को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया और अपनी बेटियों की प्राइमरी शिक्षा गांव के स्कूल में ही कराई। इसके बाद बेटियों ने सोनीपत के टीकाराम गर्ल्स कालेज से कक्षा 12वीं और हिंदू कालेज से बीएससी की। इसके बाद उन्होंने अपनी बेटियों को पढ़ाई के लिए चंड़ीगढ़ भेजा। जगदेव दहिया बताते हैं कि उनकी बेटियां डॉ. संगीता फिजिक्स से, डॉ. मोनिका दहिया बायोटेक्नोलाजी से, डॉ. नीतू दहिया बायोटेक्नोलाजी से, डॉ. कल्पना दहिया, डॉ. डैनी दहिया और डॉ. रुचि दहिया मैथ से एमएससी-पीएचडी हैं।
सभी बेटियां डाक्टरेट हैं। उनकी बेटी मोनिका दहिया कनाडा में टोरेंटो में वैज्ञानिक है तो डॉ. नीतू दहिया यूएसए में फूड एंड ड्रग डिपार्टमेंट में साइंटिस्ट है। जबकि बड़ी बेटी डॉ. संगीता सोनीपत के जीवीएम कालेज में फिजिक्स की प्रोफेसर हैं। वहीं डा. कल्पना दहिया पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में प्रोफेसर है। उन्होंने बताया कि डॉ. नीतू दहिया का कैंसर पर किया गया शोध स्वीकार कर लिया गया है। वहीं उनकी बेटी रुचि दहिया अमेरिका के यूनियन आफ एरिजोन में रिसर्च कर रही हैं। जगदेव दहिया का कहना है कि उन्होंने अपनी बेटियों को बेटे समझकर पढ़ाया और बेटियों ने भी खुद को साबित किया।
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