
नई दिल्ली। देश में कोरोना संकट के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था में सुधार देखने को मिल रहा है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का कहना है कि देश की अर्थव्यवस्था जल्द पटरी पर लौट आएगी। क्योंकि कोरोना संकट के बाद देश में सुधार दिख रहा है। कुछ दिन पहले ही आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बताया था कि देश में अगले साल से सकारात्मक रूख देखने को मिलेगा।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बताया कि भारतीय अर्थव्यवस्था पटरी पर लौटने वाली है और लिहाजा वित्तीय संस्थानों के पास पर्याप्त पूंजी होना बहुत जरूरी है। दास ने कहा कि कोरोना संक्रमण की चुनौतियों से निपटने के लिए राजकोषीय विस्तार के रास्ते को चुनना होगा। कोरोना संकटकाल में दुनियाभर की बड़ी से बड़ी अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हैं और ऐसे में भारतीय अर्थव्यवस्था भी इससे अछूती नहीं है। लेकिंन अब धीरे धीरे देश की अर्थव्यवस्था के पटरी पर लौटने के संकेत मिलने लगे हैं और बाजार में मांग भी धीरे-धीरे बढ़ने लगी है।
उन्होंने आंकड़ों को पेश करते हुए कहा था कि लॉकडाउन के दौरान राष्ट्रीय बेराजगारी दर 23 फीसदी के पार पहुंच गई थी और अब ये 6 फीसदी के आसपास आ गई है। लिहाजा इसके संकेत हैं कि देश की इकोनॉमी के पटरी पर लौट रही है और देश इकोनॉमिक रिवाइवल के मुहाने पर पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि इसके लिए जरूरी है कि वित्तीय सस्थानों के पास आर्थिक वृद्धि का समर्थन करने के लिए पर्याप्त पूंजी होनी चाहिए। दास ने बताया कि कई वित्तीय इकाइयां पहले ही पूंजी जुटा चुकी हैं क्योंकि बाजार में सुधार दिख रहा है और कुछ इकाइयां कुछ पूंजी जुटाने की योजना बना रही हैं।
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि कोरोना संकटकाल की चुनौतियों से निपटने के लिए राजकोषीय विस्तार का रास्ता चुनना होगा और मौजूदा आर्थिक माहौल को देखते हुए हमने मौद्रिक और राजकोषीय नीतियों में उदार रुख अपनाया हुआ है। जिसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर दिख रही है।
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