जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 35-ए पर दो दिन बाद हो सकती है सुनवाई

Published : Feb 25, 2019, 02:48 PM ISTUpdated : Feb 25, 2019, 02:53 PM IST
जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 35-ए पर दो दिन बाद हो सकती है सुनवाई

सार

अनुच्छेद 35-ए पर सुनवाई को लेकर जहां कश्मीर में तनाव का माहौल है। वहीं सुप्रीम कोर्ट में इसकी सुनवाई दो दिनों के बाद होगी। शीर्ष अदालत ने 26-28 फरवरी के बीच मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। इसके खिलाफ याचिका दाखिल करने वाले एनजीओ ‘वी द सिटीजन’ ने जल्द सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट से अपील की है। 

जम्मू कश्मीर को विशेष दर्ज देने वाले अनुच्छेद 35-ए के खिलाफ याचिका दाखिल करने वाले एनजीओ ‘वी द सिटीजन’ ने इस मामले पर जल्द सुनवाई करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई है। 

लेकिन अनुच्छेद 35 ए को समाप्त करने के लिए दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार और मंगलवार को सुनवाई होने की कोई संभावना नहीं है। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट की अग्रिम सूची में यह मामला शामिल नहीं है। अग्रिम सूची में मंगल, बुध और गुरुवार के मामले शमिल होते हैं।

इससे पूर्व इस माह के शुरू में यह मामला साप्ताहिक सूची में आया था, लेकिन जम्मू-कश्मीर के वकील शोएब आलम ने इसे स्थगित करने मांग की थी और कहा था कि पक्षों को पत्र के जरिए सूचना दे दी गई है। 

लेकिन 22 जनवरी को बीजेपी नेता अश्वनी उपाध्याय ने मामले को सुनवाई पर लाने का आग्रह किया, जिस पर मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा कि अनुच्छेद 35 ए के खिलाफ याचिकाओं को सुनवाई पर लाने के बारे में इन चैंबर फैसला लेंगे। 

इससे पूर्व जम्मू-कश्मीर सरकार ने पिछले वर्ष याचिका को खारिज करने की मांग की थी और कहा था प्रावधान को 60 वर्ष के बाद चुनौती नहीं दी जा सकती, ये स्थापित नियम बन चुका है जिसे सबने स्वीकार कर लिया है। इसलिए इस याचिका को खारिज कर देना चाहिए, 

राजनैतिक दलों नेकां और सीपीएम ने अनुच्छेद 35 ए के पक्ष में याचिकाएं दायर की हैं, जबकि अनुच्छेद के खिलाफ चार याचिकाएं दाखिल की गई हैं।

पिछले वर्ष अगस्त में केंद्र सरकार ने स्वयं मामले की सुनवाई टालने के लिए कहा था और आग्रह किया था कि दिसंबर में होने वाले स्थानीय निकाय के चुनावों की वजह से उसकी सुनवाई स्थगित की जाए। 

कोर्ट ने उस समय सुनवाई स्थगित कर मामले को जनवरी के लिए सूचीबद्ध कर दिया था। अब तक यह मामला 14 बार सुनवाई पर आ चुका है। 

केंद्र सरकर ने इसे संवैधानिक रूप से संवेदनशील बताया है विस्तृत सुनवाई की मांग की है, कोर्ट ने कहा है कि मामला संविधान के प्रावधान का है इसलिए ये पांच जजों की संविधान पीठ के पास जाना चाहिए।
अनुच्छेद 35 ए नेहरू सरकार ने 1954 में राष्ट्रपति के आदेश पर संविधान में रखा गया था। इसके लिए जम्मू-कश्मीर में तब की शेख अब्दुल्ला सरकार ने सिफारिश की थी। हालांकि, यह अनुच्छेद संविधान की किताब में कहीं नहीं मिलेगा, इसे संलग्नक में रखा गया है। 

अनुच्छेद 35-ए जम्मू कश्मीर के लोगों को विशेष दर्जा देता है और राज्य के बाहर के लोगों को राज्य में संपत्ति खरीदने नौकरी, पढ़ाई करने, व्यापार करने और वोट देने रोकता है। 

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