
अगर आप देश में इंटनेट की रफ्तार से नाखुश रहते हैं, तो आपके लिए खुशखबरी है। भारत 2019 के आखिर तक जीसैट-11, जीसैट-29 और जीसैट-20 का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण कर लेगा। जिसके बाद देश में इंटनेट की स्पीड 100 जीबीपीएस से अधिक हो जाएगी।
यह खुलासा किया है इसरो के अध्यक्ष के.सिवन ने। वह तेलंगाना के संगारेड्डी जिले में एक शिक्षण संस्थान के दीक्षांत समारोह में बोल रहे थे।
उन्होनें जानकारी दी, कि दुनिया के सबसे ज्यादा इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले देशों में भारत का स्थान दूसरा है। लेकिन ब्रॉडबैंड स्पीड के मामले में भारत का स्थान दुनिया में 76वां है।
लेकिन इस समस्या का समाधान जल्दी ही हो जाएगा। क्योंकि 2019 के आखिर तक अंत तक जीसैट-11, जीसैट-29 और जीसैट-20 का प्रक्षेपण किया जाएगा। जिसकी वजह से देश में उपभोक्ताओं को इंटरनेट की स्पीड 100 जीबीपीएस से ज्यादा मिलने लगेगी।
इसरो अध्यक्ष के. सिवन ने भारत के चंद्र अभियान को दूसरे देशों से बिल्कुल अलग बताते हुए जानकारी दी, कि हमारा चंद्रयान-2 ऐसी जगह पर उतरेगा, जहां कोई भी देश अब तक नहीं पहुंच पाया है। क्योंकि यह 70 डिग्री अक्षांश से ऊपर लैंड करेगा।
इसके अलावा सिवन ने एक और बड़ी दिलचस्प जानकारी दी। जिसके मुताबिक 2019 के मध्य तक भारत स्मॉल सेटेलाइट लांच व्हीकल (एसएसएलवी) का पहला प्रक्षेपण करेगा। यह दुनिया का सबसे सस्ता लांच व्हीकल होने के साथ साथ बेहद आसान डिजाइन का भी होगा। इससे पहले इस तरह का डिजायन एसेंबल करने में 70 दिन का समय लगता था। लेकिन अब इस लैपटॉप के साथ छह लोग मात्र 72 घंटों यानी तीन दिनों में ही एसेंबल किया जा सकेगा।
आम तौर पर महंगे अंतरिक्ष अनुसंधान पर उंगलियां उठाई जाती है। लेकिन इसरो अध्यक्ष ने इंटनेट स्पीड बढ़ने का राज बताकर यह स्पष्ट कर दिया है, कि कैसे इसरो का काम आम आदमी की जिंदगी से जुड़ा हुआ है। फिलहाल तो देश में 100 जीबीपीएस की स्पीड एक सपने की ही तरह है।
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