
हरियाणा में नेता प्रतिपक्ष का पद कांग्रेस के लिए मुसीबत बनता जा रहा है। एक पद के लिए कांग्रेस के कई दिग्गज नेता अपनी अपनी दावेदारी कर रहे हैं। विधायक किरण चौधरी ने इस पद के लिए दावेदारी कर दी है तो पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने भी कमर कस ली है।
हरियाणा में इनेलो में बगावत होने के बाद विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद के लिए कांग्रेस में कई गुट हो गए हैं। हर कोई इस पद के लिए दावेदारी कर रहा है। अब इनेलो नेता अभय चौटाला को 26 मार्च को पद से हटाए जाने के बाद किरण चौधरी ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र भेजकर अपनी दावेदारी की है। हालांकि चौधरी का दावा है कि उन्हें प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर का समर्थन मिला हुआ है। जबकि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा पहले ही इस पद के लिए दावा ठोक चुके हैं।
हुड्डा का कहना है कि वह वरिष्ठ नेता हैं। पूर्व मंत्री किरण चौधरी ने इसके लिए बाकायदा विधानसभा स्पीकर कंवरपाल गुर्जर को चिट्ठी लिखी है। असल में राज्य में इनेलो के दो विधायक रणबीर गंगवा और केहर सिंह रावत के इस्तीफा देने के बाद अब विधानसभा में पार्टी के 15 विधायक रह गए थे, जबकि कांग्रेस के 17 विधायक हैं। लिहाजा ऐसे में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष लिए कांग्रेस की दावेदारी बनती है। उधर किरण चौधरी की इस पहल पर अशोक तंवर का कहना है कि इस बारे में कोई फैसला हाईकमान करेगा।
लेकिन दो गुट बन जाने के कारण विधायक असमंजस की स्थिति में हैं। तंवर को हुड्डा का विरोधी माना जाता है। लिहाजा किरण चौधरी को अपना समर्थन देकर तंवर इस पद पर हुड्डा को नियुक्त नहीं करना चाहते हैं। चौधरी विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल की नेता भी हैं। उधर विधानसभा स्पीकर कंवरपाल गुर्जर ने कहा कि किरण चौधरी की चिट्ठी में विधायकों के हस्ताक्षर नहीं हैं।
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