भ्रष्टाचार पर मोदी सरकार का एक और वार, 15 अधिकारी बर्खास्त

Published : Jun 19, 2019, 01:47 AM IST
भ्रष्टाचार पर मोदी सरकार का एक और वार, 15 अधिकारी बर्खास्त

सार

सरकार ने पिछले सप्ताह भी भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और दुव्यर्वहार के आरोप में 12 आयकर अधिकारियों को नौकरी से निकाल दिया था। 

भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख जारी रखते हुए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने सीमा शुल्क एवं केंद्रीय उत्पाद शुल्क विभाग के 15 अधिकारियों की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। सरकार ने पिछले सप्ताह भी भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और दुव्यर्वहार के आरोप में 12 आयकर अधिकारियों को नौकरी से निकाल दिया था। इसके अलावा भ्रष्टाचार के आरोप में संयुक्त आयुक्त स्तर के चार आयकर अधिकारियों का डिमोशन कर उपायुक्त रैंक का बना दिया गया। 

भ्रष्टाचार एवं रिश्वतखोरी के आरोपों में बर्खास्त किए गए इन अधिकारियों में प्रिंसिपल कमिश्नर रैंक का भी एक अधिकारी शामिल है। वित्त मंत्रालय ने कहा है कि सरकार ने बुनियादी नियमों के तहत नियम संख्या 56 (जे) का इस्तेमाल करते हुए केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमाशुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के प्रधान आयुक्त से सहायक आयुक्त पद तक के अधिकारियों को सेवामुक्त कर दिया है।

मंत्रालय के आदेश के मुताबिक, इनमें कुछ पहले से निलंबित चल रहे थे। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, इन अधिकारियों के खिलाफ या तो पहले से ही सीबीआई की ओर से भ्रष्टाचार के मामले दर्ज थे या इन पर रिश्वतखोरी, जबरन वसूली और आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप हैं।

आदेश के मुताबिक दिल्ली स्थित सीबीआईसी में प्रधान अतिरिक्त महानिदेशक (ऑडिट) अनूप श्रीवास्तव, संयुक्त आयुक्त नलिन कुमार, कोलकाता में आयुक्त संसार चंद, चेन्नई में आयुक्त जी श्री हर्ष, आयुक्त रैंक के अधिकारियों अतुल दीक्षित एवं विनय बृज सिंह को 'सेवामुक्त' कर दिया गया है।

इसके अलावा दिल्ली जीएसटी जोन के उपायुक्त अमरेश जैन, अतिरिक्त आयुक्त रैंक के दो अधिकारियों अशोक महीदा एवं वीरेंद्र अग्रवाल, सहायक आयुक्त रैंक के अधिकारियों एस एस पबाना, एस एस बिष्ट, विनोद सांगा, राजू सेगर, मोहम्मद अल्ताफ और दिल्ली के लॉजिस्टिक निदेशालय के अशोक असवाल शामिल हैं।

इन सभी 15 अधिकारियों को सेवानिवृत्ति से पहले मिलने वाले वेतन एवं भत्तों के मुताबिक तीन महीने के वेतन एवं भत्ते दिए जाएंगे। नियम संख्या 56 (जे) के तहत लोकहित में किसी भी सरकारी अधिकारी को उचित प्राधिकारी द्वारा तीन माह की नोटिस अवधि के साथ सेवामुक्त किया जा सकता है। (इनपुट एजेंसी से भी)

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