
नई दिल्ली। नागरिकता संसोधन कानून को लेकर देशभर में हुई हिंसा में केरल के संगठन पीएफआई की भूमिका को लेकर जांच शुरू हो गई है। यही नहीं जांच एजेंसियां इस बात की भी जांच कर रह हैं कि आखिर इस सगंठन को कहां से पैसा मिल रहा है। कई राज्यों से पीएफआई की हिंसा में भूमिका की जांच के लिए रिपोर्ट आई है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ और मेरठ में हुई हिंसा में पीएफआई से जुड़े लोगों का नाम सामने आए हैं।
माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में पीएफआई की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। क्योंकि देशभर में हुए विरोध प्रदर्शनों में पीएफआई की भूमिका के सबूत मिले हैं। नागरिकता संसोधन कानून को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे और हिंसा भी हुई थी। जिसमें कई लोगों की मौत हुई थी। यही नहीं उपद्रवियों ने पुलिस को भी निशाना बनाया था और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया था। यूपी के कई शहरों में हुए हिंसक प्रदर्शनों में पीएफआई की भूमिका साफतौर से उजागर हुई है। जिसको लेकर अब इस संगठन की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अभी तक ये संगठन को खुद को सामाजिक संगठन कहता है। लिहाजा अब गृहमंत्रालय का एफसीआरए विभाग पीएफआई के फंडिंग की जांच कर रहा।
क्योंकि माना जा रहा है कि इस संगठन को विदेशों से चंदा मिल रहा है। माना जा रहा है कि जांच पूरी होने के बाद इस संगठन पर बैन लग सकता है। हालांकि अभी तक यूपी सरकार ने केन्द्र सरकार को पत्र लिखकर इस संगठन पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। यूपी सरकार ने जो रिपोर्ट केन्द्र सरकार को भेजी है उसमें लखनऊ और मेरठ में हुई हिंसा के पीछे पीएफआई से जुड़े लोगों का नाम सामने आने की बात कही गई है। यही नहीं यूपी में पीएफआई के कई लोगों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। वहीं कर्नाटक, असम में भी हुई हिंसा के पीछे पीएफआई का हाथ होने की जानकारी सामने आई है और इन राज्यों ने भी इसे बैन करने की मांग की है।
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