
श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना ने शुक्रवार को वहां के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को बर्खास्त कर दिया और पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे को नया प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया। श्रीलंका के राष्ट्रपति कार्यालय ने यह बारे में एक बयान जारी किया।
उधर रानिल विक्रमसिंघे ने कहा है कि राजपक्षे का शपथ लेना असंवैधानिक है। उन्होंने कहा कि वह अभी भी श्रीलंका के प्रधानमंत्री हैं। उनकी सरकार में मंत्री रहे मंगला समरवीरा ने भी ट्वीट करके राजपक्षे की प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्ति असंवैधानिक और गैरकानूनी बताया और कहा कि ये गैर लोकतांत्रिक तख्तापलट है।
सिरीसेना और विक्रमसिंघे के बीच आर्थिक और सुरक्षा नीतियों पर मतभेद के बाद यह कदम उठाया गया। इससे पहले सिरीसेना की पार्टी ने सत्तारूढ़ गठबंधन से समर्थन वापस ले लिया था।
वहीं राजपक्षे ने ट्वीट कर खुद के प्रधानमंत्री बनने की जानकारी दी है। खास बात यह है कि राजपक्षे और सिरीसेना एक दूसरे के विरोधी रहे हैं। मौजूदा राष्ट्रपति सिरीसेना ने महिंद्रा राजपक्षे को ही पिछले राष्ट्रपति चुनावों में हराया था।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया, जिससे पहले सिरीसेना और विक्रमसिंघे के बीच आर्थिक नीतियों और सरकार के रोजमर्रा के प्रशासन को लेकर कई सप्ताह से खींचातानी चल रही थी।
हालांकि रानिल विक्रमसिंघे को प्रधानमंत्री पद से हटाने का राष्ट्रपति सिरीसेना का यह फैसला श्रीलंका में संवैधानिक संकट भी पैदा कर सकता है।
क्योंकि श्रीलंका के संविधान के 19वें संशोधन के मुताबिक, बहुमत हासिल किए बिना प्रधानमंत्री को पद से नहीं हटाया जा सकता। राजपक्षे और सिरीसेना की पार्टी को मिलाकर 95 सीट है, जो बहुमत से दूर है।
विक्रमसिंघे की यूएनपी के पास 106 सीट हैं जो बहुमत से महज 7 सीट दूर है।
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