
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने अवकाश कालीन पीठ का गठन कर दिया है। लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए अवकाश कालीन पीठ का गठन किया गया।25 मई से 30 मई तक मुख्य न्यायाधीश अवकाश कालीन पीठ की अध्यक्षता करेंगे।
उम्मीद की जा रही है कि इसी दौरान अवकाश कालीन पीठ राफेल को लेकर दायर पुनर्विचार याचिका और राहुल गांधी के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर फैसला सुना सकता है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के लिए ये एक दुर्लभ उदाहरण होगा जो खुद अवकाश पीठ की अध्यक्षता करेंगे।
दरअसल 13 मई से 30 जून 2019 तक वार्षिक ग्रीष्मकालीन अवकाश के लिए सुप्रीम कोर्ट बंद रहेगा। लेकिन उसके बावजूद दो बेंच सुप्रीम कोर्ट में बैठेंगी। जिसमें न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ और दूसरी बेंच न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति एम. आर शाह की बेंच शामिल है।
यह दोनों बेंच 13 मई से लेकर 24 मई तक कार्य करेगी। जिसके बाद मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच 25 मई से 30 मई तक कार्य करेगी। छुट्टी के दूसरे भाग की दूसरी, तीसरी और चौथी पीठ में न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति एम. आर शाह और न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी है।
गौरतलब है कि पिछले साल मई में सुप्रीम कोर्ट के सामने फैसले के लिए कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजे पहुंचे थे जहां किसी राजनीतिक दल को बहुमत नहीं मिला था. इस दौरान कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन ने गवर्नर द्वारा बीजेपी को सरकार बनाने का मौका दिए जाने पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का काम किया था।
लिहाजा, लोकसभा चुनावों के नतीजों को देखते हुए ऐसी किसी परिस्थिति से निपटने के लिए खुद मुख्य न्यायाधीस एक वैकेशन बेंच में मौजूद रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है जब गर्मी की छुट्टियों के दौरान मुख्य न्यायाधीश कोर्ट की बेंच पर मौजूद रहेंगे।
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