रूस से आये 13 यहूदियों ने अपनाया हिन्दू धर्म, विदेशों में करेंगे हिंदू धर्म का प्रचार

By Team MyNationFirst Published Jan 22, 2019, 6:52 PM IST
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हिंदू धर्म और संस्कृति से आकर्षित हो कर रूस के 13 लोगों ने आज हिंदू धर्म को अपनाया. इन लोगों का कहना है कि सभी धर्मों में से हिंदू धर्म अच्छा है. अब ये लोग अपने देशों में जाकर हिंदू धर्म का प्रचार करें. इन लोगों ने भिवानी के जहरगिरी मंदिर में अपने धर्म को बदलकर हिंदू धर्म को अपनाया है.

हिंदू धर्म और संस्कृति से आकर्षित हो कर रूस के 13 लोगों ने आज हिंदू धर्म को अपनाया. इन लोगों का कहना है कि सभी धर्मों में से हिंदू धर्म अच्छा है. अब ये लोग अपने देशों में जाकर हिंदू धर्म का प्रचार करें. इन लोगों ने भिवानी के जहरगिरी मंदिर में अपने धर्म को बदलकर हिंदू धर्म को अपनाया है.


भिवानी के जहरगिरी मंदिर में रूस से आये 13 यहूदियों ने हिन्दू धर्म अपनाया है. इन लोगों का कहना है कि हिंदू धर्म और संस्कृति सिर्फ कहने को नहीं बल्कि वास्तव में पूरी दुनिया में सबसे बेहतर है. जिससे प्रभावित होकर इन यहूदियों ने ना केवल हिन्दू धर्म को अपना बल्कि जल्द ही अपने देश जाकर भोलेनाथ का मंदिर बनाकर हमारे धर्म व संस्कृति का प्रचार भी करेंगें. आधुनिक युग व चकाचौंद को देखते हुए पाश्चात्य संस्कृति से प्रभावी होने वाले लोगों खासकर युवा पीढ़ी के लिए भिवानी में ये अनोखा उदाहरण है. रुस से आये ये 13 लोग हैं जिनमें 7 महिलाएं और 6 पुरुष हैं.

जहरगिरी मंदिर के महंत अशोर गिरी ने बताया कि ये लोग काफी समय से भारत आ रहे थे. इन्होने हमारे पूरे देश के हर धाम को दौरा किया, जिसके बाद हमारे धर्म, संस्कृति और शांति के संदेश से प्रभावित होकर हिन्दू धर्म अपनाया है. उन्होने बताया कि अब कुछ दिनों बाद ये अपने देश जाकर मंदिर बनाएंगे और हमरे धर्म व संस्कृति का प्रचार करेंगें. वहीं इन लोगों ने बताया कि जब वो पांच-छह साल पहले भारत आये तो उस समय गर्मी का मौसम था.

उन्होने यहां अजीब लगा, लेकिन बार-बार आने के बाद वो यहां के मौसम के आदि हो गए. उन्होने कहा कि जब उन्होने यहां की संस्कृति व धर्म का जाना तो बहुत प्रभावित हुए. इसके बाद उन्होने देश में कई मंदिरों व धामों का दौरा कर अंत में हिन्दू धर्म अपनाने का फैसला लिया. छोटी काशी कहे जाने वाले भिवानी शहर में विदेशियों द्वारा हिन्दू धर्म अपनाना अपने आप में युवाओं के लिए एक बड़ा संदेश देता है. खासकर धर्म में आस्था रखने वाले व मंदिर के महंत इसे गर्व की बात बताते हैं.

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