कांग्रेस और एनसीपी के दबाव में आए उद्धव, निर्विरोध एमएलसी चुना जाना मुश्किल

Published : May 09, 2020, 07:46 PM IST
कांग्रेस और एनसीपी के दबाव में आए उद्धव,  निर्विरोध एमएलसी चुना जाना मुश्किल

सार

राज्य  में  नौ सीटों के लिए होने वाले विधान परिषद के चुनाव के लिए शिवसेना ने दो सीटों पर अपने  प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं जबकि एनसीपी ने भी दो सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। लेकिन अब दोनों दलों की तर्ज पर कांग्रेस ने भी साफ कर दिया है कि वह दो सीटों पर चुनाव लड़ेगी।  लिहाजा विधान परिषद के चुनाव से पहले ही राज्य में सहयोगी दलों के बीच लड़ाई शुरू हो गई है।

मुंबई। महाराष्ट्र में शिवसेना मुखिया और राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर कांग्रेस और एनसीपी का दबाव एक बार फिर दिखने लगा है। राज्य में विधान परिषद के चुनाव होने हैं और कांग्रेस और एनसीपी दो सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारना चाह रही हैं।  जबकि सरकार महज पांच सीटों पर निर्विरोध अपने प्रत्याशियों को परिषद में पहुंचा सकते हैं। जबकि दोनों दल शिवसेना से छटे प्रत्याशी को भी मैदान में उतारने का दबाव बन रही । जबकि भाजपा ने चार सीटों पर प्रत्याशी उतारे हैं।  अगर शिवसेना दो प्रत्याशी उतारती तो ठाकरे का परिषद में निर्विरोध चुना जाना मुश्किल है और इसके लिए वोटिंग होगी। 

राज्य  में  नौ सीटों के लिए होने वाले विधान परिषद के चुनाव के लिए शिवसेना ने दो सीटों पर अपने  प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं जबकि एनसीपी ने भी दो सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। लेकिन अब दोनों दलों की तर्ज पर कांग्रेस ने भी साफ कर दिया है कि वह दो सीटों पर चुनाव लड़ेगी। लिहाजा विधान परिषद के चुनाव से पहले ही राज्य में सहयोगी दलों के बीच लड़ाई शुरू हो गई है। कांग्रेस किसी भी हाल में राज्य में एक सीट पर चुनाव लड़ने के लिए राजी नहीं है।

 जिसके बाद महाविकास आघाड़ी गठबंधन में शामिल कांग्रेस ने शिवसेना और एनसीपी की मुश्किलें बढ़ा दी है। भाजपा पहले ही चार प्रत्याशियों को प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। हालांकि उसके तीन प्रत्याशी आसानी चुनाव जीत जाएंगे और चौथी सीट के लिए वोटिंग हो सकती है। राज्य में गठबंधन सरकार में शामिल तीन दल 2-2 प्रत्याशी  उतारते हैं तो उनके छह प्रत्‍याशी हो जाएंगे। ऐसे नौ सीटों पर दस प्रत्याशी हो जाएंगे।

 हालांकि शिवसेना के तर्क हैं कि राज्यसभा चुनान के दौरान एनसीपी को एक सीट ज्यादा दी  गई थी। लिहाजा एनसीपी एक ही सीट पर अपना प्रत्याशी उतारे जबकि कांग्रेस का कहना है कि उसे दो सीट मिलनी चाहिए। लिहाजा अगर महाराष्ट्र की मिली सरकार की तरफ से छह प्रत्याशी उतारे जाते हैं तो उद्धव ठाकरे के लिए वोटिंग होगी और ये उद्धव ठाकरे के लिए मुसीबत बन सकता है।

दस प्रत्याशियों की स्थिति में मतदान कराना ही पड़ेगा और गुप्त मतदान से होता है तो क्रास वोटिंग की आशंका बढ़ जाती है और ऐसे में बाजी किसी भी पक्ष की तरफ पटल सकती है। जिसको लेकर शिवसेना रिस्क नहीं लेना चाहती है। शिवसेना और एनसीपी निर्विरोध चुनाव की रणनीति पर विचार कर रही है। लेकिन इसके लिए जरूर है कि तीन ही दलों में से एक अपने प्रत्याशी का नाम वापस ले।

भाजपा ने अपने चार नेताओं को मैदान में उतार दिया है। इसमें पूर्व सांसद रंजीतसिंह मोहिते पाटिल गोपीचंद पडलकर, प्रवीण दतके और अजीत गोपछड़े का नाम शामिल है। माना जा रहा है कि भाजपा ने बड़े नामों की तुलना में कम चर्चित चेहरों को परिषद के लिए उतारा है। रंजीतसिंह मोहिते पाटिल महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री विजयसिंह मोहिते पाटिल के बेटे हैं और चुनाव से पहले ही भाजपा में शामिल हुए हैं।

एक प्रत्याशी के लिए जरूर हैं 29 मत

राज्य में 21 मई को 9 सीटों पर होने वाले विधान परिषद चुनाव के लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं। राज्य विधानसभा में 288 सदस्यीय है और ऐसे में परिषद की एक सीट जीतने के लिए 29 मतों की जरूरत होगी। राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे भी चुनाव मैदान में हैं। विधानसभा में भाजपा के 105 सदस्य हैं और पार्टी ने दावा किया है कि उसे छोटी पार्टियों के 11 विधायकों और निर्दलीय विधायकों ने समर्थन दिया है। ऐसे में उसे चार प्रत्याशियों की जीत के लिए पहली प्राथमिकता वाले 116 मतों की जरूरत होगी। वहीं राज्य सरकार के पास 169 विधायकों का समर्थन है। इस आधार पर वह पांच सीटें आसानी से जीत सकती है।
 

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