पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी पहले ऐसे नेता रहे जिनका सम्मान विपक्ष और भाजपा के धुर विरोधी भी करते हैं। वाजपेयी कुशल वक्ता तो रहे ही लेकिन उनकी हाजिर जवाबी भी बाकमाल रही।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी कुशल वक्ता तो रहे ही लेकिन उनकी हाजिर जवाबी भी बाकमाल रही। बाजदफा वह अपने उत्तर से सामने वाले को निरुत्तर कर देते थे। उनके मजाकिया स्वभाव की एक झलक इन टिप्पणियों से भी मिलती है।
1. रिपोर्टर-'आज रात आप बेनजीर भुट्टो को क्या संदेश देना चाहेंगे?' अटल-'अगर मैं कल सुबह बेनजीर को कोई संदेश दूं तो क्या कोई नुकसान है?'
2. विपक्ष-'वाजपेयी तो बहुत अच्छे हैं पर पार्टी ठीक नहीं।' अटल-'तो अच्छे वाजपेयी का आप क्या करने का इरादा रखते हैं।' 3. पाकिस्तानी पीएम-'कश्मीर के बिना पाकिस्तान अधूरा है।' अटल-'पाकिस्तान के बिना भारत अधूरा है।'
4. पाकिस्तान के साथ संबंधों पर अटल - 'आप मित्र बदल सकते हैं लेकिन पड़ोसी नहीं।' 'पड़ोसी कहते हैं कि एक हाथ से ताली नहीं बजती, हमने कहा कि चुटकी तो बज सकती है।'
5. पत्रकार-'भाजपा में एक वाजपेयी का दल है, एक आडवाणी का दल है।' अटल-'मैं कोई दलदल में नहीं हूं। मैं औरों के दलदल में अपना कमल खिलाता हूं।' 6. पासवान-'भाजपा बहुत राम की बातें करती है, पर उनमें कोई राम नहीं है। मेरा तो नाम ही राम है।' अटल-'पासवान जी, हराम में भी राम होता है।'
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