BRICS में भारत की कूटनीति की धाक: रूस, चीन, ईरान और अमेरिका के बीच बैलेंस से दुनिया हैरान

Rajkumar Upadhyaya |  
Published : Oct 24, 2024, 01:37 PM IST
BRICS में भारत की कूटनीति की धाक: रूस, चीन, ईरान और अमेरिका के बीच बैलेंस से दुनिया हैरान

सार

BRICS शिखर सम्मेलन में भारत ने रूस, चीन, ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीति का अनोखा संतुलन बनाया, जिससे अमेरिकी एक्सपर्ट्स भी हैरान हैं। 

मॉस्को: रूस के कजान शहर में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन ने ग्लोबल पॉलिटिक्स को नई दिशा दी है। रूस, चीन और ईरान जैसे शक्तिशाली देशों के बीच भारत ने अपनी कूटनीति का ऐसा संतुलन कायम किया कि अमेरिका सहित दुनियाभर के एक्सपर्ट हैरान हैं। ग्लोबल पॉलिटिकल रिस्क एक्सपर्ट इयान ब्रेमर ने विदेश नीति की तारीफ करते हुए कहा है कि भारत की ग्लोबल पोजिशन सबसे बेहतर है। 

भारत की कूटनीतिक कौशल को मजबूती

BRICS में पीएम नरेंद्र मोदी की मौजूदगी ने भारत की कूटनीतिक कौशल को और मजबूती दी है। शिखर सम्मेलन में मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरानी नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। आतंकवाद पर डबल स्टैंडर्ड को समाप्त करने की उनकी मांग उठाई। इयान ब्रेमर कहते हैं कि BRICS से यह साफ हो गया है कि भारत आज दुनिया की सबसे बेहतरीन भूराजनीतिक स्थिति में है।

रूस-चीन के साथ बैलेंस, पश्चिमी देशों से भी अच्छे संबंध

भारत की कूटनीति की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उसने रूस और चीन जैसे बड़े देशों के साथ संतुलन बनाए रखा है, जबकि अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ भी अच्छे संबंध बरकरार रखे हैं। यह संतुलन तब और महत्वपूर्ण हो जाता है जब हम देखते हैं कि रूस अपनी रणनीतिक निर्भरता चीन पर बढ़ा रहा है। ऐसे में भारत ने चीन के साथ अपने मतभेदों को बातचीत से सुलझाने का प्रयास किया है, जबकि रूस के साथ अपनी ऐतिहासिक दोस्ती बरकरार रखा है।

क्वाड शिखर सम्मेलन में भी पीएम मोदी हुए थे शामिल

इस साल सितंबर में अमेरिका के डेलावेयर में हुए छठे क्वाड लीडर्स शिखर सम्मेलन में भी प्रधानमंत्री मोदी ने शिरकत की थी और भारत की भू-राजनीतिक रणनीति का उदाहरण पेश किया था। क्वाड ग्रुप, जिसमें भारत के साथ ऑस्ट्रेलिया, जापान, और अमेरिका शामिल हैं, उसका मकसद हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना है, खासतौर पर चीन की आक्रामकता के खिलाफ। भारत ने यहां भी दिखाया कि वह न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्थिरता में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

वैश्विक संघर्ष हल करने को भारत तैयार

भारत ने न केवल आर्थिक और सैन्य मोर्चे पर अपनी शक्ति बढ़ाई है, बल्कि रूस-यूक्रेन संघर्ष में भी वह खुद को एक शांतिदूत के रूप में स्थापित कर रहा है। अजित डोभाल की रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के साथ हुई हालिया बैठकें इस बात का संकेत देती हैं कि भारत वैश्विक संघर्षों को हल करने में एक बड़ी भूमिका निभाने को तैयार है।

सिर्फ पश्चिमी देशों तक सीमित नहीं भारत की विदेश नीति

भारत की विदेश नीति न केवल पश्चिमी देशों तक सीमित है, बल्कि उसने खुद को ग्लोबल साउथ के नेता के रूप में भी स्थापित किया है। यह भूमिका बहुत विशेष है, क्योंकि भारत ने विकासशील देशों के हितों को प्रॉयरिटी दी है और उन्हें वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में शामिल करने की वकालत की है। इस कारण से, भारत न केवल एशिया में बल्कि अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे क्षेत्रों में भी अपना प्रभाव बढ़ा रहा है।

ये भी पढें-BRICS मंच से PM मोदी ने दिखाई भारत की ताकत, आतंकवाद पर दिया सख्त संदेश.

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