वायनाड में भारतीय सेना का कमाल: 190 फीट ऊंचा बेली ब्रिज बनाया, बिना रूके 31 घंटे करते रहे काम, बची कई जान

Rajkumar Upadhyaya |  
Published : Aug 03, 2024, 08:29 PM IST
वायनाड में भारतीय सेना का कमाल: 190 फीट ऊंचा बेली ब्रिज बनाया, बिना रूके 31 घंटे करते रहे काम, बची कई जान

सार

भारतीय सेना ने वायनाड में 31 घंटे में 190 फीट ऊंचा बेली ब्रिज तैयार कर दिया, जिससे कई जानें बचाईं गईं। भूस्खलन के कारण संपर्क पुल के नष्ट होने के बाद सेना ने यह महत्पूर्ण राहत कार्य किया।

नयी दिल्ली। पिछले दिनों केरल के वायनाड में लैंडस्लाइड की वजह से तीन सौ से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। आपदा से इतने लोग प्रभावित हुए हैं कि सेना, राज्य पुलिस और एनडीआरएफ टीमें लोगों को बचाने के दिन-रात लगी हैं। राहत कार्य में सबसे बड़ी समस्या संपर्क पुल की थी, जो भूस्खलन में नष्ट हो गया था। भारतीय सेना ने उसकी जगह 190 फीट ऊंचा बेली ब्रिज तैयार कर दिया। बिना रूके इस काम को महज 31 घंटे में पूरा किया। सेना के इस कमाल की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है। 

क्या है वायनाड त्रासदी?

वायनाड जिले के मेप्पाडी के पहाड़ी इलाको में 30 जुलाई की सुबह मुंडक्कई टाउन और चूरलमाला में बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ। भारी बारिश के बीच रात लगभग 1 बजे मुंडक्कई टाउन में पहली लैंडस्लाइड की घटना घटी। राहत बचाव कार्य शुरू हुआ। तभी सुबह लगभग 4 बजे चूरलमाला स्कूल के पास दूसरा लैंडस्लाइड हुआ। चारों तरफ कीचड़ का अंबार लग गया, इलाके में भयानक तबाही मची। चूरलमाला और मुंडक्कई के बीच संपर्क नष्ट हो गया, क्योंकि लैंडस्लाइड में 100 फीट लंबा कंक्रीट का पुल तबाह हो गया। 

घटना के बाद कैसे हुआ राहत कार्य?

भूस्खलन के बाद लोगों के बचाने के लिए चूरलमाला और मुंडक्कई के बीच पुल बनाने का फैसला किया गया। आर्मी ने यह जिम्मेदारी संभाली। खराब मौसम और पर्याप्त जगह की कमी के बावजूद सेना की टीम बिना रूके लगातार 31 घंटे काम में लगी रही। 1 अगस्त को शाम 6 बजे तक पुल बनकर तैयार हो गया। यह ब्रिज बचाव और राहत कार्यों में लगी टीमों के लिए वरदान साबित हुई। 

ब्रिज की खासियत क्या?

सबसे पहले ब्रिज के जरिए एम्बुलेंस भेजी गई। फिर सेना के ट्रक पुल पर चलाए गए। पुल की चौड़ाई तीन मीटर है। 24 टन वजन की कैपेसिटी वाला यह पुल अब जनता के लिए भी उपलब्ध होगा। मिट्टी हटाने और खुदाई करने वाली मशीनों के अलावा ट्रक, जीपें भी ब्रिज पर चलाई जा सकती हैं। हालांकि अभी सिर्फ ऑफ-रोड जीपें ही बचाव व राहत कार्य के लिए यूज की जा रही हैं। 

मेजर मोहन और उनकी टीम की भूमिका अहम

रिकॉर्ड समय में ब्रिज का निर्माण कर केरल के मेजर अनीश मोहन ने भारतीय सेना के मद्रास इंजीनियर्स ग्रुप की स्पेशियलिटी को एक बार फिर साबित कर दिया है। अनीश मोहन सिविल इंजीनियरिंग से स्नातक हैं। उन्हें सितंबर 2012 में कमीशन मिला था। वर्तमान में बैंगलोर में मिलिट्री इंजीनियरिंग ग्रुप और सेंटर में तैनात हैं और 144 जवानों की टीम का नेतृत्व करते हैं। 

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