उत्तर प्रदेश की 70 वर्षीय ओमवती देवी ने रेलवे ट्रैक की खराबी को देखकर अपनी लाल साड़ी से ट्रेन रुकवाई और 150 यात्रियों की जान बचाई। जानिए उनकी प्रेरणादायक कहानी!
Real-Life Hero: अक्सर जब हम हीरो की कल्पना करते हैं, तो हमारे दिमाग में सुपरमैन या बैटमैन जैसी छवियाँ आती हैं—लाल टोपी, शक्तिशाली उड़ान, और अपराध से लड़ने की क्षमता। लेकिन असली हीरो हमेशा हमारी कल्पना से अलग होते हैं। वे हमारे बीच होते हैं, साधारण कपड़ों में, साड़ी में, बिना किसी सुपरपावर के, लेकिन फिर भी असाधारण काम कर जाते हैं। ऐसी ही एक असली हीरो हैं उत्तर प्रदेश की 70 वर्षीय ओमवती देवी, जिन्होंने अपनी लाल साड़ी की मदद से 150 यात्रियों की जान बचा ली।
यह घटना तीन साल पहले की है, जब उत्तर प्रदेश की रहने वाली ओमवती देवी अपनी नियमित सैर पर रेलवे ट्रैक के पास थीं।
ओमवती देवी को एहसास हुआ कि अगर उन्होंने कुछ नहीं किया, तो ट्रेन के यात्रियों की जान खतरे में पड़ सकती थी। उन्होंने तुरंत एक साहसिक कदम उठाया!
उनकी सूझबूझ और हिम्मत ने 150 यात्रियों की जान बचाई।
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जब मीडिया ने उनसे पूछा कि उन्होंने ऐसा कैसे किया, तो उन्होंने बताया "मैंने सुना था कि लाल रंग खतरे का संकेत होता है। जब मैंने रेलवे ट्रैक की स्थिति देखी, तो मैंने बिना समय गवाएं अपनी लाल साड़ी को ट्रेन के सामने लहराया। सौभाग्य से, ड्राइवर ने इसे देख लिया और समय रहते ट्रेन रोक दी।" इस बहादुरी भरे काम के लिए ओमवती देवी को पूरे गांव और रेलवे अधिकारियों की ओर से सम्मानित किया गया।
ओमवती देवी अकेली नहीं हैं जिन्होंने अपनी सूझबूझ और साहस से लोगों की जान बचाई। दुनिया में कई ऐसे गुमनाम नायक हैं जो बिना किसी सुपरपावर के असली हीरो बन गए।
नाइजीरिया के जोसेफ ब्लैंकसन ने अपनी जान जोखिम में डालकर 13 लोगों को डूबने से बचाया। 14वें व्यक्ति को बचाने की कोशिश में वह खुद शहीद हो गए। उनकी बहादुरी को हमेशा याद रखा जाएगा।
1. साल 2004 में, 10 वर्षीय टिली स्मिथ ने थाईलैंड के एक समुद्र तट पर अजीब लहरों को देखा।
2. उसने तुरंत अपने माता-पिता को सतर्क किया और सभी को समुद्र तट से हटने को कहा।
3. बाद में यह सुनामी निकली, लेकिन उनकी सतर्कता के कारण कई लोग बच गए।
4. टिली को उनकी बहादुरी के लिए सम्मानित किया गया।
असली हीरो बनी ओमवती
ओमवती देवी की कहानी साबित करती है कि हीरो बनने के लिए न तो आपको सुपरमैन होने की जरूरत है, न ही स्पाइडरमैन। कभी-कभी, एक साधारण साड़ी और साहस ही सबसे बड़ा हथियार साबित होते हैं।
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