प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन में गवाह की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। जानिए भारतीय रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1908 के तहत कौन गवाह बन सकता है और किन दस्तावेजों की जरूरत होती है।
Property Witness Rules: भारत में संपत्ति की खरीद-बिक्री एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है, और इसका कानूनी रूप से पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) आवश्यक होता है। भारतीय रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1908 के तहत किसी भी संपत्ति की रजिस्ट्री में गवाहों की जरूरत होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कौन गवाह बन सकता है और इसके लिए क्या नियम हैं? अगर नहीं, तो इस लेख में हम आपको विस्तार से बताएंगे कि प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन में गवाह चुनने के लिए किन कानूनी प्रावधानों का पालन करना जरूरी है।
प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन क्यों जरूरी होता है?
जब कोई संपत्ति एक मालिक से दूसरे को हस्तांतरित की जाती है, तो उसे कानूनी रूप से वैध बनाने के लिए स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस के भुगतान के बाद सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में पंजीकृत कराना होता है। इस प्रक्रिया को प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन कहते हैं। यह दस्तावेज केवल कानूनी मान्यता ही नहीं देता, बल्कि भविष्य में संपत्ति विवादों से भी बचाव करता है।
गवाह की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण होती है?
प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन में गवाहों का प्रमुख कार्य यह सुनिश्चित करना होता है कि:
1. संपत्ति का हस्तांतरण उचित और वैध तरीके से हो रहा है।
2. कोई भी धोखाधड़ी या अवैध लेन-देन न हो।
3. विक्रेता और खरीदार दोनों की सहमति से रजिस्ट्रेशन हो रहा है।
गवाहों की जानकारी को बायोमेट्रिक सत्यापन और पहचान प्रमाण के जरिए दर्ज किया जाता है, जिससे भविष्य में किसी भी तरह के विवाद से बचा जा सके।
प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन में गवाह बनने के लिए क्या योग्यता होनी चाहिए?
1. आयु: गवाह बनने के लिए व्यक्ति की न्यूनतम आयु 18 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए।
2. पहचान प्रमाण: गवाह को अपनी पहचान स्थापित करने के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस या अन्य सरकारी आईडी प्रस्तुत करनी होती है।
3. निष्पक्षता: गवाह कोई ऐसा व्यक्ति होना चाहिए जो विक्रेता (Seller) और खरीदार (Buyer) में से कोई न हो। यानी, संपत्ति हस्तांतरण से उसका कोई सीधा संबंध नहीं होना चाहिए।
4. उपस्थिति: रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के दौरान दोनों गवाहों की वास्तविक उपस्थिति आवश्यक होती है।
4. किसी भी प्रकार के वित्तीय या कानूनी विवाद में फंसे व्यक्ति
5. ऐसे व्यक्ति जिनके पास वैध पहचान प्रमाण नहीं है
प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में गवाहों की भूमिका
1. गवाहों को रजिस्ट्रार कार्यालय में उपस्थित रहना होता है।
2. उनके बायोमेट्रिक डेटा और पहचान पत्रों की जांच होती है।
3. गवाहों को यह प्रमाणित करना होता है कि संपत्ति हस्तांतरण में कोई जबरदस्ती या धोखाधड़ी नहीं हो रही है।
4. उनकी जानकारी को रजिस्ट्री दस्तावेजों में दर्ज किया जाता है।
अगर गलत गवाह चुन लिया जाए तो क्या होगा?
यदि गवाहों की जानकारी गलत पाई जाती है या कोई अयोग्य व्यक्ति गवाह बनता है, तो:
1. रजिस्ट्रेशन अमान्य घोषित किया जा सकता है।
2. न्यायिक विवाद या कानूनी समस्या उत्पन्न हो सकती है।
3. संपत्ति मालिकाना हक पर सवाल उठ सकते हैं।
4. रजिस्ट्रेशन की पूरी प्रक्रिया फिर से करनी पड़ सकती है, जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होगी।
गवाह चुनते समय सावधानी जरूरी!
1. प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन में दो गवाहों का होना आवश्यक है।
2. गवाह 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र का कोई भी व्यक्ति हो सकता है, बशर्ते वह विक्रेता या खरीदार न हो।
3. गवाहों को वैध पहचान प्रमाण प्रस्तुत करना अनिवार्य होता है।
4. यदि गलत व्यक्ति गवाह बनता है, तो रजिस्ट्रेशन अवैध हो सकता है। इसलिए, प्रॉपर्टी खरीदते या बेचते समय गवाहों का चयन सोच-समझकर करें, ताकि भविष्य में कोई कानूनी अड़चन न आए।
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