राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) को लेकर पूर्वोत्तर में तेज हो रही सियासत के बीच भारत ने असम में अवैध तरीके से रह रहे 21 बांग्लादेशियों को शनिवार को वापस उनके देश भेज दिया। असम के करीमगंज जिले से इन बांग्लादेशियों को बांग्लादेश भेजा गया है।  

करीमगंज जिले के सुतारकंडी में बांग्लादेश से सटी सीमा पर इन बांग्लादेशियों को पूरी कानूनी प्रक्रिया के अनुसार वापस भेजा गया। इनमें 19 पुरुष एवं दो महिलाएं हैं। 
 
बांग्लादेश से अवैध तरीके से घुसपैठ करने वाले ये बांग्लादेशी नागरिक समय-समय पर असम और मेघालय के अलग-अलग हिस्सों में रहे हैं।  इन सभी को पूर्व में गिरफ्तार करने के बाद सिल्चर स्थित शिविर में रखा गया था। ये लोग वहां पिछले 2-4 साल से थे। 

जिन लोगों को वापस बांग्लादेश भेजा गया है उनकी पहचान बबलू अहमद, सुमान फकीर, मासूम अहमद, नाजिमुद्दीन, अशरफुल आलम चौधरी, लिटन कांता दास, तौफीक अली, राजू अहमद, दिलवर हुसैन, अब्दुस शक्कूर, शमीम अहमद, रूबेल अहमद, साबेल अहमद, कायरूल इस्लाम, रमजान अली, जाहिदा बेगम, सफिया बेगम, अब्दुल वाहिद, नसीर हुसैन, मीर पाबेल मियां और शफीकुल इस्लाम के तौर पर हुई है। ये लोग बांग्लादेश के शिलहट, गोपालगंज, तंगाइल, रंगपुर, किशोरगंज, कनईघाट जिलों के रहने वाले हैं। 

इन लोगों को देश से वापस भेजे की प्रक्रिया के दौरान केंद्रीय गृहमंत्रालय, असम  सरकार, असम पुलिस और बांग्लादेश बार्डर गार्ड के अधिकारी मौजूद थे। 

करीमगंज जिले की सीमा पुलिस अधिकारी अब्दुल वकीस ने कहा, '2015 से अलग-अलग इलाकों से 21 बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया था। न्यायिक प्रक्रिया के बाद इन सभी को सिल्चर में एक कैंप में रखा गया था। बांग्लादेश भेज जाने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद और केंद्रीय गृहमंत्रालय तथा बांग्लादेश उच्चायोग से हरी झंडी मिलने के बाद इन सभी को उनके देश भेज दिया गया।'

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पिछले साल जुलाई में भी असम के मनकाचार चेकपोस्ट से 52 बांग्लादेशी नागरिकों को असम से बाहर किया गया था। वहीं वर्ष 2017 में 17 बांग्लादेशी घुसपैठियों को असम के करीमगंज जिले से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमा से उनके देश भेजा गया। 

2013 में 5,234 बांग्लादेशी नागरिकों को देश से बाहर किया गया था। वहीं 2014 में यह संख्या 989 थी। 2015 में 474 और 2016 में 308 लोगों को वापस बांग्लादेश भेजा गया।