आत्मरक्षा  

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  • balakot

    Views5, Mar 2019, 9:21 PM

    सैन्य बलों की कार्रवाई पर संदेह करना देश के विरुद्ध अपराध

    आम भारतीयों तक जैसे ही यह समाचार पहुंचा कि हमारे वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने पाकिस्तान की सीमा में घुसकर जैश ए मोहम्मद के ठिकानों पर हमला किया पूरे देश में उत्साह और रोमांच का अभूतपूर्व वातावरण बन गया। आम लोगों के लिए यह समाचार ही काफी था। विदेश सचिव ने आकर बयान दे दिया और यह देश के लिए पर्याप्त था। लोगों को यही लगा कि वर्षों से आतंकवाद से त्रस्त हमारे देश ने अब पाकिस्तान को और दुनिया को दिखा दिया कि हमारे पास राजनीतिक इच्छाशक्ति है और उसे पूरा करने के संसाधन एवं लक्ष्य पा लेने के लिए जान की बाजी लगा देने वाले जाबांज भी। पूरी दुनिया ने भारत के विरुद्ध एक शब्द नहीं बोला,बल्कि कुछ देशों ने तो बयान दिया कि भारत ने आत्मरक्षा में कदम उठाया है। पाकिस्तान के सामने समस्या पैदा हो गई कि वह प्रतिक्रिया व्यक्त करे तो कैसे? किंतु हमारे देश की पार्टियों और नेताओं ने धीरे-धीरे जो वातावरण बना दिया उससे पाकिस्तान का काम आसान हो गया। 
     

  • News25, Feb 2019, 1:54 PM

    पत्थरबाजों के खिलाफ सुरक्षा बलों के मानवाधिकारों की रक्षा क्यों नहीं? सुप्रीम कोर्ट सुनेगा याचिका

    एक सेवारत और एक रिटायर्ड अधिकारी की बेटी की याचिका में सैन्यकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा गया है कि पथराव करने वालों के खिलाफ आत्मरक्षा के लिए की गई कार्रवाई पर भी मामले दर्ज किए जा रहे हैं।

  • Subodh Kumar Singh

    News28, Dec 2018, 9:37 AM

    बुलंदशहर हिंसा में नया मोड़, इंस्पेक्टर की हत्या के आरोप में दिल्ली का कैब ड्राइवर गिरफ्तार

    बुलंदशहर में भीड़ के हमले में इंस्पेक्टर सुबोध के अलावा एक अन्य युवक की मौत हो गई थी। एसपी ने यह भी बताया कि इंस्पेक्टर ने आत्मरक्षा में गोली चलाई थी, जिसमें सुमित नाम के युवक की मौत हो गई थी। पुलिस के सूत्रों बताया कि 'वीडियो फुटेज’ और कुछ लोगों की गवाही के आधार पर इंस्पेक्टर की हत्या में नट को संदिग्ध पाया गया।

  • News20, Dec 2018, 7:08 PM

    किसने कहा, 'अपनी भी गलती है', ये है पत्थरबाजों की मौत की असली कहानी

    पुलवामा में आतंकियों से हुए एनकाउंटर के बाद स्थानीय लोगों ने सुरक्षा बलों पर पत्थरबाजी कर दी थी। 15 दिसंबर को हुए इस एनकाउंटर में तीन आतंकी मारे गए थे। जहूर ठोकर, ताहिर हिज्बी और अदनान वानी उर्फ हाशिम भाई के खात्म के बाद पत्थरबाजों ने सुरक्षा बलों के वाहनों पर पत्थरों और लाठी-डंडों से हमला कर दिया। इसके बाद सुरक्षा बलों को आत्मरक्षा में गोलियां चलानी पड़ीं। इसमें आठ पत्थरबाजों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद जम्मू-कश्मीर में राजनीति तेज हो गई। पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने सुरक्षा बलों पर सवाल उठाए। वहीं नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारुक अब्दुल्ला ने कहा कि लोग 'बेगुनाह' थे और सेना को इस तरह की स्थिति में पानी की बौछार का प्रयोग करना चाहिए। हालांकि 'माय नेशन' के हाथ लगे एक ऑडियो में एक अलग ही कहानी  सामने आई है। दो आतंकियों की इस बातचीत में खुलासा हुआ है कि घटना के समय भीड़ में आतंकी भी मौजूद थे और सुरक्षा बलों पर फायरिंग कर रहे थे।