ज्योतिरादित्य  

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  • <p><strong>জানা যায় শচীন কখনই রাজনীতিতে প্রবেশ করতে চাননি। তবে রাজেশ পাইলটের মৃত্যুর পরে তাঁকে সিদ্ধান্ত পরিবর্তন করতে হয়েছিল। ২০০৪-এ প্রথম লোকসভা নির্বাচনে লড়েন শচীন। মাত্র ২৬ বছর বয়সেই সাংসদ হন। তিনিই ছিলেন দেশের কনিষ্ঠতম সাংসদ।</strong></p>

    News21, Sep 2020, 11:56 AM

    कांग्रेस के पायलट कभी राजस्थान में बनने वाले थे 'सिंधिया', अब सिंधिया के गढ़ में करेंगे कांग्रेस का प्रचार

    असल में राज्य की 28 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए भाजपा और कांग्रेस ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। कांग्रेस अभी  तक  सोशल मीडिया में ही सक्रिय है और जबकि  भाजपा जमीन पर जाकर काम करने में जुटी है।

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    News22, Jul 2020, 8:26 PM

    जब राज्यसभा में आमने-सामने आए धुरविरोधी 'महाराज' और 'दिग्गी राजा'

    सिंधिया ने आज पहली बार राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ली। हालांकि इस बार शपथ ग्रहण सभापति के कक्ष में संचालित किया गया। इस दौरान सिंधिया का सामना उनके कांग्रेस के पुराने साथी और प्रतिद्वंदी कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह से हुआ। 

  • കര്‍ശന പരിശോധനയെ തുടര്‍ന്ന് ആളൊഴിഞ്ഞ പാര്‍ലമെന്‍റ് പരിസരം.

    News22, Jul 2020, 10:49 AM

    राज्यसभा में आज बढ़ेगी भाजपा की ताकत, प्रियंका, सिंधिया लेंगे राज्यसभा की सदस्यता की शपथ

    आज शपथ लेने वालों में भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह, मल्लिकार्जुन खड़गे, झारखंड मुक्ति मोर्चा नेता शिबू सोरेन और शिवसेना की प्रिंयका चतुर्वेदी समेत प्रमुख चेहरे 61 राज्यसभा सांसद शामिल हैं।  जो सदस्य आज शपथ ग्रहण समारोह सदन में शामिल नहीं हो सकेंगे वह आगामी मानसून सत्र में शपथ ले सकेंगे।

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    News2, Jul 2020, 1:50 PM

    शिवराज के राज में सिंधिया बने 'महाराज'

    असल में राज्य में होने वाले विधानसभा उपचुनाव की झलक कैबिनेट विस्तार में देखने को मिली है। इसमें सबसे ज्यादा फायदा ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके समर्थकों को मिला है। जबकि पार्टी ने पुराने नेताओं को कैबिनेट से दूर रखकर सिंधिया समर्थकों को शामिल किया है।

  • <p>Shivraj Singh Chauhan, Madhya Pradesh, Corona in Madhya Pradesh, Corona epidemic, Corona infection, Economy in Corona, Madhya Pradesh economy, Labor reform<br />
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    News28, Jun 2020, 2:30 PM

    मध्य प्रदेश में अगले हफ्ते हो सकता है शिवराज सरकार का कैबिनेट विस्तार, विधानसभा उपचुनाव पर नजर

    बताया जा रहा है कि कैबिनेट में राज्य भाजपा के सभी धड़ों से नेताओं को जगह मिल सकती है। वहीं हाल ही में कांग्रेस से आए ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबी नेताओं को कैबिनेट में शामिल किया जाएगा। ताकि कांग्रेस से आए नेताओं को खुश किया जा सके और उपचुनाव में पार्टी को इसका फायदा मिले।

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    News20, Jun 2020, 9:58 AM

    'महाराज' की जीत के बाद 'राज्याभिषेक' की तैयारी

    सिंधिया मध्य प्रदेश की राजनीति के दिग्गज नेताओं में शुमार हो गए हैं। राज्य में कांग्रेस की सत्ता जाने का पूरा श्रेय सिंधिया को ही जाता है। वहीं राज्य में 2018 में हुए चुनाव में उन्होंने कांग्रेस की सत्ता में वापसी में अहम भूमिका निभाई थी। लेकिन कांग्रेस में तवज्जो न मिलने के कारण आखिरकार उन्हें कांग्रेस से अलविदा कहना पड़ा था। 

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    News10, Jun 2020, 12:55 PM

    मध्य प्रदेश में 'महाराज 'बनेंगे विधानसभा उपचुनाव के केन्द्र

    दो महीने पहले ही सिंधिया ने कांग्रेस से इस्तीफा देकर और बाद में उनके 22 समर्थक विधायकों को इस्तीफा देकर राज्य की सियासत को बदल दिया था। राज्य में कांग्रेस की सरकार सत्ता से बेदखल हो गई और कमलनाथ को सीएम के पद से इस्तीफा देना पड़ा था। लिहाजा अब कमलनाथ और कांग्रेस सिंधिया से इससे बदला लेना चाहते हैं।

  • <p>जब हमने इस वेबसाइट से जुड़ी जानकारी निकलाने की कोशिश की तो मालूम पड़ा&nbsp;इंडिया न्यूज एक पॉलिटिकल व्यंग्य की साईट है। यहां व्यंग के साथ राजनीतिक खबरें पोस्ट की जाती हैं सिंधिया वाली खबर भी एक&nbsp;पॉलिटिकल सटायर था..जिसका हकीकत से कोई वास्ता नही है।</p>

    News6, Jun 2020, 12:58 PM

    सिंधिया का खेल बिगाड़ने के लिए 'विभीषण' तलाश रही है कांग्रेस

    राज्यसभा की तीन सीटों पर होने चुनाव में भाजपा आसानी से दो सीटों पर जीत हासिल कर सकती है। जबकि कांग्रेस एक सीट पर जीत हासिल करेगी। वहीं कांग्रेस ने मैदान में दो प्रत्याशियों को उतारा है।  हालांकि संख्या बल के आधार पर कांग्रेस एक ही सीट जीत सकती। वहीं फिलहाल कांग्रेस भाजपा के प्रत्याशी ज्योतिरादित्य सिंधिया की राह में मुश्किलें पैदा करने की  तैयारी में है।

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    News28, May 2020, 1:42 PM

    सिंधिया की राह पर चली बागी अदिति, गांधी परिवार के गढ़ में ढह सकता है कांग्रेस का आखिरी किला

    रायबरेली को गांधी परिवार का गढ़ कहा जाता है। लेकिन यहां से कांग्रेस की एकमात्र विधायक अदिति सिंह भी अब जल्द ही कांग्रेस को अलविदा कह सकती हैं। फिलहाल  अदिति सिंह ने कांग्रेस के पूर्व बागी नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया का अनुसरण करते हैं अपने ट्वविटर एकाउंट से कांग्रेस नाम और लोगो को हटा दिया है। जबकि सिंधिया ने कांग्रेस को छोड़ने से पहले इस तरह से कांग्रेस नाम और लोगो को हटाया था।

  • <p><strong>ये निकला नतीजा</strong></p>

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<p>सोशल मीडिया पर किया जा रहा यह दावा गलत है कि सिंधिया मध्य प्रदेश सरकार की कैबिनेट में जगह नहीं मिलने से नाराज हैं और बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में लौटना चाहते हैं।&nbsp;</p>

    News25, May 2020, 8:34 AM

    जानें क्यों कांग्रेस सिंधिया को बता रही है 'गायब'

     असल में राज्य में कांग्रेस की सरकार को गिराने में सिंधिया की अहम भूमिका रही और सिंधिया समर्थक 22 विधायकों ने कांग्रेस से इस्तीफा दिया। जिसके बाद राज्य की कमलनाथ सरकार गिर गई। फिलहाल कांग्रेस सिंधिया के खिलाफ मोर्चा जारी रखना चाहती है।  

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    News21, May 2020, 12:39 PM

    सिंधिया के गढ़ में फिर से पार्टी को खड़ा कर रही है कांग्रेस

    राज्य की 24 सीटों के लिए उपचुनाव होने हैं। क्योंकि पिछले दिनों कांग्रेस से इस्तीफा देकर 22 विधायक भाजपा में चल गए थे और इसके कारण राज्य की तत्कालीन कांग्रेस सरकार अल्पमत में आ गई थी। ये सभी 22 विधायक कभी कांग्रेस के महासचिव रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबी थे और भाजपा में शामिल होने के बाद दो नेताओं को मंत्री भी बनाया गया है। 

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    News9, May 2020, 12:39 PM

    क्यों सिंघवी भाजपा में शामिल होने को लेकर दे रहे हैं सफाई

    असल में पिछले दो दिनों से सोशल मीडिया में सिंघवी को लेकर चर्चा हो रही है। सिंघवी कांग्रेस के बड़े नेता है और कानून मंत्री भी रह चुके हैं। लेकिन पार्टी से नाराज चल रहे हैं।  अगर देखे तो कांग्रेस में वरिष्ठ और कनिष्ठ की लड़ाई तेज चल रही है और राहुल गांधी के करीबी माने जाने वाले नेता पार्टी में साइडलाइन हैं। वहीं वरिष्ठ नेताओं को तवज्जो दी जा रही है। 

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बता दें कि शिवराज सिंह चौहान ने कोरोना संकट के बीच 23 मार्च को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। वह अब तक 29 दिन का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं। इतने दिन पर वह अकेले ही सरकार से सारे विभाग संभाल रहे थे। वहीं कुछ दिन पहले पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने उनपर आरोप लगाया था कि देश में शिवराज सिंह ऐसे सीएम हैं जो कोरोना के संकट में बिना मंत्रियों की सरकर चला रहे हैं।</p>

    News21, Apr 2020, 2:37 PM

    शिवराज सिंह ने किया पहला कैबिनेट विस्तार, पांच मंत्रियों ने ली शपथ

    शिवराज सिंह चौहान के कैबिनेट में पांच लोगों को जगह दी गई है। हालांकि सिंधिया  की तरफ से पांच नेताओं को जगह देने की मांग की जा रही थी। लेकिन भाजपा ने उनके दो ही सहयोगियों को जगह दी है। गौरतलब है कि कांग्रेस से छह विधायकों ने इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थामा था और इसमें  छह मंत्री थे। 

  • भोपाल. मध्य प्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। प्रदेश में अब तक 313 कोरोना पॉजिटिव मरीजों की पुष्टि हो चुकी है, वहीं इसमें से 23 की मौत भी हो चुकी है। रोज बढ़ रहे मामलो को देखते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहन अब सख्त रवैया अपनाने को तैयार हो गए हैं। उन्होंने दिल्‍ली के निजामुद्दीन मरकज में शामिल होकर प्रदेश में आए तबलीगी जमात के लोगों को स्‍पष्‍ट शब्‍दों में चेतावनी दी है। सीएम ने कहा-यह लोग  24 घंटे के अंदर  24 घंटे के अंदर सामने आ जाएं, नहीं तो वह आपराधिक कार्रवाई के लिए तैयार रहें।

    News18, Apr 2020, 2:35 PM

    शिवराज के कैबिनेट विस्तार में महाराज का पेंच

    ऐसी चर्चा है राज्य में शिवराज सिंह की अगुवाई वाली भाजपा सरकार का रविवार को कैबिनेट विस्तार हो सकता है। अभी तक शिवराज सिंह ने ही मुख्यमंत्री की शपथ ली है और वह सरकार चला रहे हैं।  जिसको लेकर कांग्रेस ने सरकार पर आरोप लगाना शुरू कर दिया है कि वह सिंधिया समर्थकों को जगह नहीं दे पा रही है।  वहीं राज्य में कोरोना संकट को देखते हुए शिवराज भी कैबिनेट विस्तार चाहते हैं। 

  • बता दें कि सिंधिया के स्वागत में भाजपा कार्यालय में राज्य के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष बीडी शर्मा, पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव और भारतीय जनता पार्टी के कई बड़े नेता मौजूद थे।

    Views27, Mar 2020, 11:29 AM

    एमपी में खत्म होने की कगार पर है कांग्रेस, दोहरा रहा है इतिहास

    सिंधिया परिवार हमेशा से ही भारतीय जनता पार्टी के पूर्ववर्ती भारतीय जनसंघ का प्रमुख संरक्षक रहा है।  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ भी उनका बहुत अच्छा संबंध रहा है। जिवाजीराव सिंधिया ज्योतिरादित्य सिंधिया के दादा थे और वह अंतिम मराठा राजा थे और इसके साथ ही उनके जवाहर लाल नेहरू के साथ अच्छे रिश्ते थे। 1961 में जीवाजी राव और 1964 में नेहरू की मौत के बाद राजमाता विजया राजे सिंधिया ने भ्रष्ट वंशवादी पार्टी में वापस रहने का कोई कारण नहीं देखा।