विवेकानंद  

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  • Bengal violence

    Views17, May 2019, 6:26 PM IST

    लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ी चुनौती है पश्चिम बंगाल की राजनीतिक हिंसा

    कोलकाता में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के नेतृत्व में आयोजित रोड शो में जितनी संख्या में लोग उमड़े थे उससे पता चल रहा था कि वहां का राजनीतिक वातावरण बदल रहा है। किंतु वह रोड शो अपने गंतव्य विवेकानंद हाउस तक पहुंचता उसके पहले ही कॉलेज स्ट्रीट पर कुछ लोग काले झंडे लेकर विरोध कर रहे थे। लेकिन अचानक अमित शाह की गाड़ी पर डंडा फेंका गया। उसके बाद पथराव हुआ तथा आगजनी की कोशिशें हुईं। यह रोड शो को बाधित करने का प्रयास था। 

  • News29, Apr 2019, 3:25 PM IST

    ममता के गढ़ में गरजे पीएम मोदी, दीदी की जमीन खिसकी, मेरे संपर्क में हैं 40 विधायक

    ममता बनर्जी के पत्थर के रसगुल्ले खिलाने वाले बयान पर भी पलटवार किया। मोदी बोले, दीदी बंगाल की मिट्टी-पत्थरों से बना रसगुल्ला खिलाना चाहती हैं। बंगाल की मिट्टी का रसगुल्ला मतलब, रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद, चैतन्य महाप्रभु, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे महापुरुषों की पैरों की धूल। यह मेरा सौभाग्य होगा। 

  • jesus in yog mudra

    Views25, Dec 2018, 4:30 PM IST

    जीसस क्राइस्ट पर भारत के प्रभाव को नकारता क्यों है चर्च?

    जीसस क्राइस्ट यानी ईसा मसीह का आज जन्मदिन है। एक महान संत और ईश्वरपुत्र के रुप में मानवता को उनकी देन असंदिग्ध है। लेकिन आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि जीसस मूल रुप से सनातन परंपरा के वाहक थे। उनके मूल विचार आर्य अष्टांगिक मार्ग से मेल खाते हैं। लेकिन इन बातों को जानबूझकर छिपाया गया और उसके मूल विचारों के उपर सेमेटिक(एक पैगंबर,एक किताब) विचारों का मुलम्मा चढ़ा दिया गया। ऐसा जीसस की मौत के रोमन सम्राट कॉन्सटेन्टाइन के जमाने में किया गया। ईसा की मौत के 325 साल बाद नायसिया(वर्तमान तुर्की) में एक परिषद् बुलाई गई, जिसमें जीसस के देवत्व की घोषणा की गई। जिसके बाद रोमन साम्राज्यवाद ने ईसा मसीह के व्यक्तित्व को अपना शासन फैलाने के नैतिक हथियार के रुप में इस्तेमाल करना शुरु कर दिया। प्रेम और दया के प्रतीक ईसा के नाम पर जो खूनी लड़ाईयां हुईं, वह इतिहास में ‘क्रूसेड’ के नाम से आज भी याद की जाती हैं। ऐसा करने के लिए जानबूझ कर जीसस का भारत से संबंध झुठलाया जाने लगा। जानिए जीसस पर भारत के प्रभाव के जुड़े ऐतिहासिक और अहम तथ्य़- 

  • Indian should be proud on his knowlledge

    Views21, Nov 2018, 7:56 PM IST

    अपने ज्ञान पर गर्व करना सीखो भारत

    ऐसा लगता है कि  जब पश्चिम के लोग भारतीयों की सराहना करेंगे तभी भारतीयों को अपने प्राचीन ज्ञान की इस अलौकिक संपदा का अहसास होगा। 

  • sabrimala protest

    Views8, Nov 2018, 11:20 AM IST

    एक थोपा गया फैसला

    “उन प्राचीन धर्मों के न्याय में हमें उस दृष्टिकोण को नहीं लेना चाहिए जिस पर हम उलझन में हैं, लेकिन खुद को उन शुरुआती समय के विचार और जीवन की स्थिति में रखना चाहिए।” 
    - स्वामी विवेकानंद

  • News6, Nov 2018, 1:05 PM IST

    छत्तीसगढ़ में चुनाव से पहले बस्तर में नक्सलियों को बड़ा झटका, 62 ने हथियार डाले

    12 नवंबर को छत्तीसगढ़ में जिन 18 सीटों पर मतदान होना है, वे सभी नक्सलियों के प्रभाव वाली हैं। ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में नक्सलियों के हथियार डालने को काफी अहम माना जा रहा है।

  • If the leader was Subhash Chandra Bose than Country will be like this

    Views21, Oct 2018, 5:22 PM IST

    आजादी के बाद नेताजी के हाथ में होता नेतृत्व तो कैसा होता हमारा देश?

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लाल किले से कहा, कि आजादी के बाद अगर नेताजी सुभाषचंद्र बोस या पटेल को देश का नेतृत्व सौंपा जाता, तो देश की परिस्थितियां ही कुछ और होतीं।क्या होतीं यह परिस्थितियां, आइए एक नजर डालते हैं----

  • News5, Oct 2018, 10:58 AM IST

    आतंक छोड़ मुख्यधारा में शामिल हुए सात नक्सली

    5 लाख के सात इनामी माओवादियों ने बस्तर आईजी विवेकानंद सिन्हा के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। 

  • bastar

    News21, Sep 2018, 12:05 PM IST

    5 लाख रुपए के इनामी नक्सली और उसकी महिला साथी मानको दुग्गा ने किया सरेंडर

    छत्तीसगढ़ के कांकेर में दो खूंखार नक्सलियों ने बस्तर के आईजी विवेकानंद सिन्हा के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में एक महिला नक्सली मानको दुग्गा उर्फ देवकी और उसका साथी लच्छू मरकाम उर्फ कमलेश है।

  • Original speech of swami Vivekananda

    News11, Sep 2018, 3:33 PM IST

    स्वामी विवेकानंद का शिकागो में दिया गया असली भाषण

    आज ही के दिन सन् 1893 में स्वामी विवेकानंद ने शिकागो में आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन में यह ऐतिहासिक भाषण दिया था। आज से सवा सौ(125) साल पहले दिया यह भाषण आज भी कितना प्रासंगिक है, आप खुद देखिए। 

  • Forget the assence of hindutva, so we suffered since last thousends years

    News8, Sep 2018, 12:24 PM IST

    भूल गए मूल सिद्धांत, सहनी पड़ी हजार साल तक प्रताड़ना- संघ प्रमुख

    ‘हिंदू समाज में प्रतिभावान लोगों की संख्या सबसे अधिक है। लेकिन हिंदू कभी साथ आने का प्रयास नहीं करते हैं। उनका साथ आना अपनेआप में कठिन कार्य है।’