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भारत में साधु-संतों की विभिन्न परंपराएं हैं। इनमें नागा साधु अपनी कठोर साधना और जीवनशैली के लिए मशहूर हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं महिला नागा साधुओं की दुनिया कैसी होती है?
महिला नागा साधु, पुरुष नागा साधुओं की तरह ही कठोर तपस्या करती हैं। ये साध्वी सालों की साधना के बाद नागा साधु बनती हैं और सांसारिक मोह-माया से मुक्त रहती हैं।
महिला नागा साधु अपना जीवन जंगलों, गुफाओं और पहाड़ों में बिताती हैं। वे पूरी तरह भगवान की भक्ति और साधना में लीन रहती हैं।
महिला नागा साधु पुरुष नागा साधुओं की तरह निर्वस्त्र नहीं रहतीं। वे गेरुए रंग के बिना सिलाई वाले वस्त्र पहनती हैं और अपने शरीर पर भभूत (राख) लगाती हैं।
इनका गेरुआ वस्त्र उनकी साधना और साधु जीवन का प्रतीक होता है। साथ ही, सिर पर जटाएं उनकी तपस्या की पहचान हैं।
महिला नागा साधु केवल विशेष अवसरों, जैसे कुंभ या महाकुंभ मेले में दर्शन देती हैं। पवित्र स्नान के बाद वे फिर से अपनी साधना में लौट जाती हैं।