क्या आपको भी इररेगुलर पीरियड की प्रॉब्लम है? समय रहते सचेत हो जाएं वरना ....

By Kavish AzizFirst Published Jun 6, 2024, 1:16 PM IST
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इर्रेगुलर पीरियड आज महिलाओं में आम समस्या बनती जा रही है। हार्मोनल इम्बैलेंस, लापरवाह लाइफस्टाइल और गलत खान पान इसे बढ़ावा देता है। समय पर इसका उपचार न होने पर आगे इनफर्टिलिटी की सम्भावना बढ़ जाती है। 

हेल्थ डेस्क। आज की भाग दौड़ भरी लाइफ में  लापरवाह खान पान, बे इंतेहा स्ट्रेस की वजह से महिलाओं में इर्रेगुलर पीरियड्स (Irregular Period Problem ) की समस्या बढ़ती जा रही है। वैसे तो इर्रेगुलर पीरियड के बहुत सारे रीजन होते हैं लेकिन डॉक्टर के अनुसार जरूरत से ज्यादा तनाव हार्मोनल इंबैलेंस बढ़ाते हैं जिसके कारण पीरियड्स इररेगुलर हो जाते हैं। 

35 दिन से ज़्यादा के गैप को कहते हैं इर्रेगुलर पीरियड 

सबसे पहले ये समझना ज़रूरी है की इर्रेगुलर पीरियड है क्या, और उसकी अवधि कैसे समझा जा सकता है। पीरियड्स की शुरुआत 9 से 13 साल के बीच में लड़कियों में हो जाती है। 14, 15 साल तक यह पीरियड नियमित हो जाते हैं। रेगुलर पीरियड का समय 21 से 35 दिन का होता है। जो 6 से 7 दिनों तक बना रहता  है, लेकिन अगर लगातार आपका पीरियड मिस हो रहा है यानी 21 से 35 दिन के बजाय 2 महीने डेढ़ महीने के बाद आ रहा है तो यह संकेत इर्रेगुलर पीरियड्स के हैं। 

क्यों होते हैं यह इर्रेगुलर पीरियड्स (What causes irregular periods)

इर्रेगुलर पीरियड्स का सबसे बड़ा रीजन होता है तनाव। लोहिया हॉस्पिटल लखनऊ की गाइनकोलॉजिस्ट डॉ सरोज के अनुसार स्ट्रेस (How Does Stress Impact  Period)इर्रेगुलर पीरियड का सबसे बड़ा रीजन है क्योंकि जब महिलाएं तनाव में होती है तो शरीर कॉर्टिसोल नमक एक हार्मोन रिलीज करता है जो एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टरॉन के लेवल को डिस्टर्ब करता है जिसके कारण अनियमित पीरियड की समस्या बढ़ती है। 

थायराइड और पीसीओडी (Thyroid and PCOD)

हार्मोनल इंबैलेंस के ही कारण थायराइड और पीसीओडी जैसी समस्याएं शरीर में पैदा होती हैं जिसके कारण वेट बढ़ता है, सर के बाल टूटते हैं शरीर में दर्द होता है।  यही नहीं इसकी वजह से इनफर्टिलिटी की समस्या भी बढ़ जाती है।

इर्रेगुलर पीरियड्स  का इलाज

इर्रेगुलर पीरियड्स  को रेगुलर करने के लिए बाजार में बहुत सी दवाइयां आती हैं लेकिन कुछ रूटीन भी फॉलो करके पीरियड्स को दुरुस्त किया जा सकता है जैसे  हर रोज 40 मिनट तक योग करने से हार्मोन (How to balance Hormone Level) का स्तर कम होता है। हल्का फुल्का वर्कआउट, जंक और  प्रोसेस्ड फूड के बजाय घर का बना खाना,ज्यादा तेल मसाले वाले भोजन से दूर रहना अपनी लाइफ स्टाइल को रूटीन फुल  बनाना पीरियड की अनियमितताओं को दूर  करने में सहायक हो सकता है।इसके बाद  भी डॉक्टर से समय समय पर कंसल्ट करते रहना चाहिए। 

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