महालक्ष्मी योग: दिवाली पर लक्ष्मी-पूजन के 6 शुभ मुहूर्त, पूजा सामग्री और विधि जानें

Rajkumar Upadhyaya |  
Published : Oct 30, 2024, 04:27 PM ISTUpdated : Oct 30, 2024, 04:33 PM IST
महालक्ष्मी योग: दिवाली पर लक्ष्मी-पूजन के 6 शुभ मुहूर्त, पूजा सामग्री और विधि जानें

सार

दीवाली पर पूजन कैसे करें? स्टूडेंट्स, व्यापारी, किसानों के लिए पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजन सामग्री ​में क्या-क्या चीजें यूज होती हैं, जानें।

नई दिल्ली। इस बार दीपावली की तिथि को लेकर संशय है, क्योंकि अमावस्या 31 अक्टूबर की शाम 4 बजे से 1 नवम्बर शाम 4 बजे तक रहेगा। इसकी वजह से लोगों के बीच संशय है कि दिवाली किस दिन मनाई जाए। बहरहाल, देश में ज्यादातर जगहों पर 31 अक्‍टूबर को दीवाली मनाई जा रही है। उस दिन लक्ष्मी-पूजन के लिए कई शुभ योग भी बन रहे हैं। 

दीवाली की शाम को 4 राजयोग

एस्ट्रोलॉजी के एक्सपर्ट्स का कहना है कि दीवाली की शाम को 4 राजयोग (शश, कुलदीपक, शंख और लक्ष्मी योग) बन रहे हैं, जो समृद्धि देने वाले हैं। इन योग में पूजा का महत्व बढ़ जाता है। आप भी जानना चाह रहे होंगे कि गृहस्थों, स्टूडेंट्स, किसानों और व्यापारियों के लिए पूजा का कौन सा समय सही रहेगा। आइए उसके बारे में डिटेल में जानते हैं।

गृहस्थों इन तीन शुभ मुहूर्त में कर सकते हैं पूजा

ज्योतिषियों के मुताबिक, गृहस्थ तीन शुभ मुहूर्त में पूजा कर सकते हैं। एक शुभ मुहूर्त शाम 5:00 से 6:30 बजे तक है। दूसरा शाम 5:37 से 7:00 और तीसरा शुभ मुहूर्त शाम 7:15 से रात 8:45 तक रहेगा।

स्टूडेंट्स, किसान और व्यापारी कब पूजा करें?

जानकारों का कहना है कि स्टूडेंट्स के लिए शाम 6:48 से रात 8:48 तक पूजा का शुभ मुहूर्त है, जबकि व्यापारियों के लिए शाम 7:15 से रात 8:45 तक और रात 1:15 से 3:27 तक पूजा करना ठीक रहेगा। किसान शाम 5:45 से 7:15 तक वाले शुभ मुहूर्त में पूजा कर सकते हैं।

दीपावली में लगती है ये पूजन सामग्री

दीपावली पर पूजन के लिए लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति के अलावा राम दरबार, शिव भैरव, चांदी का सिक्का, ​नारियल, लकड़ी की चौकी, लाल कपड़ा, गेहूं, दवात और कलम, कलश या लोटा आवश्यकतानुसार चाहिए होता है। इसके अलावा गंगाजल, पवित्री (कुशा घास की बनी अंगूठी), हल्दी, चंदन, जनेऊ, लौंग, पान, सुपारी, इत्र, तेल, बत्ती, कमल, दुर्वा, चावल, दूध, दही, घी, शहद, कुमकुम, हल्दी की गांठ, फूल और फूलों की माला, फल, रूई, मिट्टी के 10 दीपक, कपूर, खील, बताशे, माचिस, धूपबत्ती, दीपक और माचिस की जरूरत पड़ती है। 

कैसे करें दीवाली पर पूजा?

दीवाली पर पूजा की शुरूआत गणेश जी के पूजन से शुरू होती है। पहले, ''ॐ गं गणपतये नम:'' मंत्र के साथ गणेश जी को पानी और पंचामृत से स्नान कराकर पूजन सामग्री अर्पित करें। नैवेद्य लगाने के साथ धूप-दीप दिखाते हुए कुछ दक्षिणा चढ़ाना चाहिए।

कलश स्थापना और पूजन कैसे करें?

कलश में पानी भरें और फिर उसमें सिक्का, सुपारी, अक्षत और तुलसी पत्र डालें। गंगाजल और दुर्वा भी कलश में डालें। कलश पर आम के पत्ते रखकर उस पर नारियल रखें। ध्यान रखें कि नारियल लाल कपड़े से लपेटा हुआ हो। हाथ में फूल-अक्षत लें और फिर वरुण देवता का आहवान करने के बाद ''वरुण सहितं सर्वेभ्यो देवेभ्यो, स्थापयामि पूजयामि'' मंत्र पढ़कर फूल-अक्षत कलश पर डालें। फिर, हाथ में फूल-अक्षत लें और वरुण, कुबेर और इंद्र का ध्यान करें। फिर यह मंत्र पढें। ''सर्वेभ्यो देवेभ्यो स्थापयामि,  इहागच्छ इह तिष्ठ, नमस्कारं करोमि।'' यह मंत्र बोलकर फूल-अक्षत कलश पर छोड़ दें। फिर यह मंत्र बोलें,''सर्वेभ्यो देवेभ्यो नम:'' और पूजन सामग्री कलश पर चढ़ाएं।

तिजोरी या आलमारी में कुबेर पूजन कैसे किया जाता है?

व्यापारियों को पैसे रखने वाली जगह जैसे-तिजोरी या आलमारी में स्वस्तिक बनाते हैं और कुबेर की पूजा करते हैं। मान्यताओं के मुताबिक, कुबेर को धन का रक्षक माना गया है।  कुबेर का ध्यान करें और यह मंत्र पढ़ें। ''ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय, धन-धान्याधिपतये नमः''।

इन मं​त्रों से करें स्वस्तिक की पूजा

''ॐ श्रीकुबेराय नमः पदयोः पाद्यं समर्पयामि'' मंत्र बोलकर स्वस्तिक पर जल चढ़ाएं। ''ॐ श्रीकुबेराय नमः गंधाक्षतं समर्पयामि'' मंत्र बोलकर चंदन और अक्षत अर्पित करें। ''ॐ श्रीकुबेराय नमः पुष्पं समर्पयामि'' बोलकर फूल चढ़ाने का काम करें। ''ॐ श्रीकुबेराय नमः धूपं-दीपं समर्पयामि'' मंत्र बोलते हुए दीपक और धूप बत्ती घुमाएं।''ॐ श्रीकुबेराय नमः नैवेद्यं एवं आचमनीयं समर्पयामि'' मंत्र का उच्चारण करते हुए मिठाई चढ़ाकर जल अर्पित करें।

दीपक पूजन कैसे करें?

दीवाली पर दीपक का पूजन करने के लिए एक थाली में 11, 21 या उससे ज्यादा दीपक जलाएं। उन दीपकों को मां लक्ष्मी जी के पास रखें। ''ॐ दीपावल्यै नमः'' मंत्र बोलते हुए फूल और पूजन सामग्री से दीपमालिकाओं की पूजा करें। फल और धान चढ़ाएं। साथ ही भगवान गणेश, महालक्ष्मी के साथ सभी देवताओं को भी धान अर्पित करें। 

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