
भोपाल। राह चलते सड़क के चौराहों पर अपने अक्सर उन बच्चों को देखा होगा जो भीख मांगते हैं। आप या तो उन्हें कुछ पैसे देकर आगे बढ़ जाते हैं या उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन भोपाल की माही इन बच्चों के लिए मसीहा है। ऐसे 100 बच्चों को माही ने नशे की लत से बाहर निकाला और शिक्षित करने का बीड़ा उठाया। माय नेशन हिंदी से माही ने अपनी मुहिम के बारे में विस्तार से बताया।
कौन है माही भजनी
माही भोपाल के जवाहर चौक इलाके में रहती हैं। उनके पास पत्रकारिता की डिग्री है। बचपन में जब माही अपने घर के पास कूड़ा बीनने वाले बच्चों को देखती थी, भीख मांगने वाले बच्चों को देखती थी तो अपनी मां से यह सवाल करती थी कि "यह बच्चे मेरी तरह स्कूल क्यों नहीं जाते"। बचपन के सवाल ने माही के दिल में इन बच्चों के लिए जगह बनाया और माही ने तय किया कि वह ऐसे ही बच्चों के लिए अपने जीवन में कुछ करेंगी।
और शुरू किया बच्चों को शिक्षित करने की मुहीम
माही ने अकेले दम पर झुग्गी झोपड़ियां में जाना शुरू किया और वहां गरीब बच्चों को शिक्षा के लिए प्रेरित करना शुरू किया। साल 2011 में माही ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर अनुनय एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसाइटी बनाई । इस समिति का काम था गरीब बच्चों को नशे की लत से निकालकर शिक्षित करना धीरे-धीरे माही की इस संस्था ने अपने पांव पसारने शुरू किया और भोपाल में पांच केंद्र बना लिए जहां उन गरीब बच्चों को शिक्षा दिलाई जाती है जो बेसहारा होते हैं या उनके मां-बाप गरीब होते हैं।
झुग्गी झोपड़ी के बच्चों को पढ़ाना मुश्किल होता था
माही ने बताया की शुरुआत में बहुत दिक्कतें होती थी झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले परिवार के लोग बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाहते थे। वहां शिक्षा से ज्यादा दो वक्त की रोटी के लिए कमाई पर ध्यान दिया जाता था। इसलिए उन परिवारों को कन्वेंस करने में बहुत दिक्कत होती थी। कई बार हताश भी हुई लेकिन धीरे-धीरे तमाम बच्चे माही से जुड़ने लगे और माही गरीब बच्चों की मांही दीदी बन गई।
बच्चों को दी जाती है इंग्लिश स्पीकिंग ट्रेनिंग
माही ने बताया कि उनकी संस्था झुग्गी झोपड़ी में जाकर बच्चों को आईडेंटिफाई करती है। उनका स्कूल में दाखिला करती है ट्यूशन की व्यवस्था करती है इंग्लिश स्पीकिंग ट्रेनिंग दी जाती है और इसके अलावा बच्चों की स्किल को नर्चर किया जाता है जिसमें डांस सिंगिंग पेंटिंग वगैरह इंक्लूड होती है।
फंड की।होती है दिक्कत
माही ने बताया की शुरुआत में संस्था के लिए फंड वह अपने पास से और अपने दोस्तों के जरिए लगाती थी लेकिन जैसे-जैसे बच्चे बढ़ते चले गए वैसे-वैसे फंड की दिक्कत होती चलेगी हालांकि कुछ डोनर उनकी संस्था से जुड़े हैं लेकिन कभी-कभी फाइनेंशियल प्रोबलम आ ही जाती है। माही को इस काम के लिए भोपाल में और भोपाल के बाहर कई सम्मान मिल चुके हैं।
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