
मध्य प्रदेश। साल 2022 की बात है विजय कुमार चंसौरिया का नाम खूब चर्चा में था। हर तीसरा आदमी उनकी तारीफ कर रहा था। वजह थी विजय ने रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली 40 लाख रुपए की राशि बेसहारा बच्चों में बांट दी। यह बात इसलिए भी बहुत बड़ी थी क्योंकि विजय किसी रईस घराने से नहीं आते थे बल्कि उनका जीवन संघर्षों में गुजरा था। उन्होंने एक-एक पाई बहुत मेहनत से कमाया था। माय नेशन हिंदी से विजय चंसौरिया ने अपनी जर्नी शेयर किया ।
कौन है विजय कुमार चंसौरिया
विजय पन्ना जिले के टिकुरिया गांव के रहने वाले हैं। उनके घर की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। उनके पिता खेती किसानी करते थे। विजय अपने पांच भाई बहनों में सबसे बड़े थे। खेती किसानी से दो वक्त की रोटी का गुजारा हो जाता था लेकिन पांच बच्चों को पढाना मुश्किल था। विजय पढ़ना चाहते थे लेकिन गरीबी की वजह से विजय की पढ़ाई 3 साल के लिए छूट गई थी।उन्होंने आठवीं पास करने के बाद दूध बेचना शुरू कर दिया। फिर विजय ने रिक्शा भी चलाना शुरु किया, इन दोनों कामों के साथ विजय ने पढ़ाई ज्वाइन किया और इस काम से विजय अपने स्कूल की फीस भी भर रहे थे और अपने परिवार के लिए सहारा भी बन चुके थे। 1982 में विजय ने पॉलिटिकल साइंस में मास्टर्स की डिग्री हासिल किया और 1983 में विजय का सिलेक्शन प्राइमरी स्कूल के टीचर के तौर पर हो गया।
आदिवासी बाहुल्य इलाके में विजय थे टीचर
विजय रक्सेहा में सहायक शिक्षक बने थे। रक्सेहा में दसवीं तक की पढ़ाई होती थी। विजय ने महसूस किया कि रक्सेहा के बच्चे आर्थिक तंगी के कारण फीस नहीं भर पाते थे। इस कारण कई बच्चे अपनी परीक्षा नहीं दे पाते थे। यहां के लोगों के जीवन का गुजारा जंगल था। बच्चों के ऐसे हालात को देखते हुए विजय ने फैसला कर लिया था की रिटायरमेंट के बाद पीएफ का जो पैसा आएगा वह विजय इन बच्चों की पढ़ाई के लिए दान कर देंगे। और विजय ने अपने जनरल प्रॉपर्टीज फंड में हर महीने 10 की बजाय 20000 जमा करना शुरू कर दिया।
इस तरह हुआ दान के पैसों का इस्तेमाल
विजय कहते हैं दान किए गए पैसे से एक ट्रस्ट बनाया गया इस ट्रस्ट में सरपंच, टीचर, हेड मास्टर, के साथ विजय भी हैं। कुल मिलाकर 11 सदस्य हैं। विजय कहते हैं अक्सर लोग मुझसे कहते हैं इतनी बड़ी राशि दान कर दिया क्या आपको खलता नहीं है। विजय कहते हैं मेरा जवाब होता है मैंने अपने जीवन को देने के लिए दान, लेने के लिए ज्ञान, और त्यागने के लिए अभियान के सिद्धांत पर दिया है। और जब सिद्धांत ऐसे हो तो कसक कैसी। विजय का मानना है कि शिक्षा ही एक ऐसा हथियार है जो गरीबी को खत्म कर सकती है और शिक्षा एक ऐसा खजाना है जो बांटने से खत्म नहीं होती।
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