आज़ादी की लड़ाई में पति समेत सभी साथी हो गए शहीद, लखनऊ में पहला मोंटेसरी स्कूल खोला दुर्गा भाभी ने

Published : Feb 08, 2024, 11:27 PM ISTUpdated : Feb 08, 2024, 11:28 PM IST
आज़ादी की लड़ाई में पति समेत सभी साथी हो गए शहीद, लखनऊ में पहला मोंटेसरी स्कूल खोला दुर्गा भाभी ने

सार

  यह तो हम सभी जानते हैं की 1947 में जब हमारा देश आजाद हुआ तो उसके पहले बहुत से क्रांतिकारियों  ने अपनी शहादत दी है इनमें से भी क्रांतिकारी थे जिन्होंने आजाद हिंदुस्तान को देखा। आजादी की लड़ाई में इन्होंने अपने दोस्त अपने परिवार सबको खो  दिया। इन्हीं में एक है दुर्गा भाभी जिनके पति बम बनाते वक्त शहीद हो गए चंद्रशेखर भगत सिंह दुर्गा भाभी के साथी थे। क्रांतिकारियों के बीच में दुर्गा भाभी ही थी जिन्होंने देश को आजाद होते देखा ।और इसी के साथ लखनऊ में उन्होंने एक स्कूल खोला जो लखनऊ मांटेसरी स्कूल के नाम से मशहूर है। 

लखनऊ । दुर्गा भाभी के नाम से अंग्रेज थर-थर कांपते थे। हिंदुस्तान की आजादी के लिए अपनी जान की परवाह किए बगैर अंग्रेजों से लोहा लेने वाली दुर्गा भाभी का पूरा नाम दुर्गावती देवी है और वह भगत सिंह की भाभी के नाम से मशहूर है। लखनऊ में दुर्गा भाभी ने बच्चों के लिए मोंटेसरी विद्यालय खोला जिसका नाम लखनऊ मांटेसरी स्कूल है। इस स्कूल के बारे में और दुर्गा भाभी के बारे में स्कूल के प्रिंसिपल प्रशांत मिश्रा ने माय नेशन हिंदी  विस्तार से बताया।

कौन है दुर्गा भाभी

दुर्गा भाभी का जन्म 7 अक्टूबर 1902 को कौशांबी के शहजादपुर गांव में हुआ था उनके पिता का नाम पंडित बांके बिहारी था और उनके पिता इलाहाबाद कलेक्ट्रेट में नजीर थे जब दुर्गा भाभी सिर्फ 10 साल की थी तो उनकी शादी लाहौर के भगवती चरण वोहरा के साथ हो गई थी। दुर्गा भाभी के ससुर शिवचरण बोहरा रेलवे में थे अंग्रेजो ने उन्हें राय साहब का खिताब दिया था इसके बावजूद दुर्गा भाभी के पति भगवती चरण देश को अंग्रेजों से आजाद करना चाहते थे और इस काम में उनके साथ दिया उनकी पत्नी दुर्गा वोहरा ने। इन दोनों पति-पत्नी ने अंग्रेजों के खिलाफ जंग छोड़ दिया।

इकट्ठा होने लगे सभी क्रांतिकारी

धीरे-धीरे क्रांतिकारियों की जमात इकट्ठा होने लगी और भगवती चरण भगत सिंह और रामचंद्र कपूर ने मिलकर नौजवान भारत सभा की स्थापना किया लेकिन 28 में 1930 को रवि नदी के तट पर जब भगवती चरण अपने साथियों के साथ बम बना रहे थे तो शहीद हो गए। पति की शहादत के बाद भी दुर्गा भाभी देश को आजाद करने के लिए अपने क्रांतिकारी साथियों के साथ एक्टिव रही। राजस्थान से पिस्टल लाने और ले जाने का काम करती थी। 9 अक्टूबर 1930 को दुर्गा भाभी ने गवर्नर हेली पर गोली चलाई जिसमें हेली बच गया लेकिन उनके अधिकारी घायल हो गया और इसके बाद अंग्रेज दुर्गा भाभी के पीछे पड़ गया दुर्गा भाभी की गिरफ्तारी हुई।

3 साल के लिए किया गया नजरबंद

असेंबली में बम फेंकने के बाद भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त को गिरफ्तार करके फांसी दे दी गई चंद्रशेखर आजाद ने अंग्रेजों से लड़ते वक्त जब खुद को गोली मारी थी वह पिस्टल भी दुर्गा भाभी नहीं चंद्रशेखर को दी थी धीरे-धीरे दुर्गा भाभी के सभी क्रांतिकारी साथी शहीद होने लगे और वह अकेली पड़ती चली गई। अंग्रेज पुलिस ने दुर्गा भाभी को परेशान करना जारी रखा दुर्गा भाभी दिल्ली छोड़कर लाहौर चली गई लेकिन लाहौर में भी उनकी गिरफ्तारी हुई और उन्हें 3 साल तक नजर बंद कर दिया गया।

लाहौर से किया गया जिला बदर

1935 में जब दुर्गा भाभी जेल से रिहा हुई तो उन्हें लाहौर से जिला बदर कर दिया गया गाजियाबाद में दुर्गा भाभी ने एक टीचर की नौकरी कर ली 1940 में दुर्गा भाभी ने मद्रास में मारिया मांटेसरी से जाकर मोंटेसरी विधि का ट्रेनिंग लिया और उसके बाद लखनऊ के कैंट रोड में पांच बच्चों के साथ एक मोंटेसरी विद्यालय खोल दिया जो आज लखनऊ मांटेसरी इंटर कॉलेज के नाम से जाना जाता है । मांटेसरी शिक्षा पद्धति का लखनऊ में यह पहला स्कूल था। 

पंडित नेहरू ने किया था शिलान्यास

स्कूल के प्रिंसिपल प्रशांत मिश्रा ने बताया की 7 फरवरी 1957 को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने स्कूल का शिलान्यास किया था इस स्कूल से रफी अहमद किदवई, आचार्य नरेंद्र देव, राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन, सरोजिनी नायडू, चंद्र दत्त तिवारी जैसे लोगों के नाम जुड़े रहे। एक समय ऐसा था जब स्कूल की पढ़ाई लिखाई को देखते हुए स्कूल में एडमिशन के लिए बड़ी-बड़ी हस्तियों से सिफारिश कराई जाती थी स्कूल से जो स्टूडेंट निकले उनमें कई आईएएस, आईपीएस, जर्नलिस्ट, और सर्जन है।

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