नौकरी नहीं मिली तो परिवार चलाने के लिए 'डिग्री' के नाम पर ही खोल दी चाय की दुकान, नाम रखा 'बीए पास चायवाला'

Rajkumar Upadhyaya |  
Published : Jul 14, 2023, 07:17 PM IST
नौकरी नहीं मिली तो परिवार चलाने के लिए 'डिग्री' के नाम पर ही खोल दी चाय की दुकान, नाम रखा 'बीए पास चायवाला'

सार

बिहार के सोनू कुमार को काफी कोशिशों के बाद भी नौकरी नहीं मिली तो परिवार का पेट पालने के लिए अपनी पढ़ाई की डिग्री के नाम पर ही चाय की दुकान खोल ली। नाम रखा 'बीए पास चायवाला'।

मुंगेर। बिहार के सोनू कुमार ने साल 2013 में ग्रेजुएशन किया। काफी कोशिशों के बाद भी उन्हें नौकरी नहीं मिली। घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। ऐसे में परिवार चलाना उनके लिए मुश्किल हो रहा था। आखिरकार थक हार कर उन्होंने अपनी पढ़ाई की डिग्री के नाम पर ही चाय की दुकान खोल ली। नाम रखा 'बीए पास चायवाला'। इसी चाय की दुकान की कमाई से वह अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं।

ओवरएज हो गए, फाइनेंशियल प्रॉब्लम भी फेस की

सोनू कुमार कहते हैं कि ग्रेजुएशन के बाद नौकरी के लिए काफी ट्राई किया। बहुत बार फिजिकल नहीं निकल सका, कभी मेरिट नहीं बनी। किसी न किसी वजह से हर बार असफलता ही हाथ लग रही थी। बीतते समय के साथ वह ओवरएज हो गए। इस वजह से नौकरी के लिए आगे फार्म भी नहीं भर सकते थे। घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। 

अनोखे नाम की वजह से चर्चा

उस दौरान उन्होंने अपने पैरों पर खड़ा होने की काफी कोशिशें भी की। पर उनके सामने दिक्कतें आईं तो सोनू कुमार के मन में चाय की दुकान खोलन का विचार आया और उन्होंने खड़गपुर-तारापुर मुख्य मार्ग के पास चाय की दुकान खोल दी। दुकान का नाम भी अपनी डिग्री के नाम पर ही रखा। अनोखे नाम की वजह से यह दुकान लोगों को आकर्षित कर रही है। 

पिलाते हैं 5 फ्लेवर की चाय

बीए पास चायवाला पांच फ्लेवर में चाय पिला रहा है। नॉर्मल, अदरक, इलायची, तुलसी और मसाला फ्लेवर की चाय की कीमतें भी एक सी है। उन्होंने अलग अलग फ्लेवर के चाय की अलग अलग कीमत नहीं रखी है। यह भी एक प्रमुख कारण है कि बीए पास चायवाला की दुकान चर्चा में है। वह अपनी चाय की दुकान के जरिए सोशल वर्क भी कर रहे हैं। कांवरियों को वह नि:शुल्क जल उपलब्ध करा रहे हैं। 

बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाया

सोनू कुमार ने पढ़ाई के दौरान बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाया। फिर आगे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुट गए। उस दौरान समय न मिलने की वजह से उन्होंने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना छोड़ दिया। मुंगेर के कैथी गांव के रहने वाले सोनू कहते हैं कि पहले ट्यूशन पढ़ाता था। पर ट्यूशन से परिवार का भरण पोषण संभव नहीं है। इसकी वजह से उन्होंने ट्यूशन पढ़ाने के बजाए किसी और काम को शुरु करने पर फोकस किया। जिससे वह परिवार के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को पूरा कर सकें। 

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